Dangerous Buildings in Haryana: दिल्ली हादसे के बाद हरियाणा में खुली पोल, किसी भी विभाग के पास नहीं है असुरक्षित भवनों का डाटा
पंचकूला: देश के विभिन्न राज्यों से गाहे-बगाहे किसी न किसी कारण ऊंची-ऊंची इमारतें ढहने के मामले सामने आते रहते हैं. कई राज्यों में दशकों पहले बनी कई इमारतें आज भी मौजूद हैं. इनमें रिहायशी मंजिलों से लेकर व्यवसायिक इमारतें भी शामिल हैं. लेकिन इमारत सरकारी हो, गैर सरकारी या फिर निजी हो, वे कितनी सुरक्षित हैं या जर्जर हो गई हैं, इंजीनियरिंग विभाग समेत विभिन्न सरकारी विभाग इसका आकलन करते हैं.
दरअसल, कुछ दिनों पहले दिल्ली में एक हॉस्टल के ढहने का मामला सामने आया था. इस घटना के बाद हरियाणा में भी ऐसी कोई घटना न हो, इसके लिए प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों से जर्जर इमारतों के संबंध में बातचीत की गई. इस दौरान चौंकाने वाली सच्चाई यह सामने आई कि राज्य सरकार के पास असुरक्षित/जर्जर इमारतों का कोई खाका तैयार ही नहीं है.
एक-दूसरे जिम्मेदारी डाल रहे विभाग: हरियाणा की जर्जर इमारतों की जानकारी के लिए पीडबल्यूडी (बीएंडआर) विभाग, टाउन एवं कंट्री प्लानिंग विभाग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग और दमकल विभाग से संपर्क किया गया. सभी विभागीय अधिकारियों ने राज्य की जर्जर इमारतों की जानकारी उनके पास नहीं होने की बात कही. किसी एक विभाग ने दूसरे विभाग की जिम्मेदारी बताई तो दूसरे ने तीसरे विभाग की. यहां तक कि नगर निगम/नगर पालिका के पास अपने-अपने जिलों की जानकारी होने की बात कही गई. लेकिन प्रदेश भर की जर्जर इमारतों का डाटा किसी विभाग के पास मौजूद नहीं मिला.
"फायर विभाग के पास कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं": हरियाणा के डायरेक्टोरेट ऑफ फायर सर्विसिज के डायरेक्टर, आईएएस शेखर विद्यार्थी से इस संबंध में बाचतीत की गई. उन्होंने कहा कि, "फायर विभाग के पास जर्जर इमारतों संबंधी कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. किसी इमारत को असुरक्षित घोषित किया जाना है या नहीं, यह मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है. जबकि प्रदेश की सभी मंजिलों/इमारतों के पूर्ण सुरक्षित होने की प्रमाणिकता दमकल विभाग से एनओसी मिलने पर ही होती है. विभाग द्वारा पुरानी और नई इमारतों को आग से बचाव के संबंध में एनओसी जारी किए जाने और नोटिस की कार्रवाई की जाती है."
पीडबल्यूडी विभाग ने रखा अपना पक्ष: वहीं, हरियाणा के पीडबल्यूडी (बीएंडआर) विभाग के (इंजीनियनर-इन-चीफ- बिल्डिंग्स एवं एचओडी) अनिल कुमार दहिया से राज्य की घोषित असुरक्षित/जर्जर इमारतों के संबंध में बातचीत की गई. उन्होंने कहा कि, "विभिन्न विभागों के पास अपनी-अपनी इमारतों के रख-रखाव की जिम्मेदारी होती है. संबंधित विभाग ही तय करते हैं कि उनके विभाग को अलॉट हुई कोई इमारत सुरक्षित है या वह इस्तेमाल के योग्य नहीं रही है. मंजिल-मंजिल पर निर्भर करता है कि वह कितनी सुरक्षित हैं या नहीं. कोई संबंधित अधिकारी अपने आकलन में किसी इमारत को सुरक्षित नहीं मानता लेकिन दूसरे अधिकारी को लगता है कि वह इस्तेमाल के योग्य है. इस कारण असुरक्षित इमारतों का कोई डाटा जिला स्तर पर तो हो सकता है लेकिन समग्र डाटा किसी विभाग के पास मिलना मुश्किल है. क्योंकि कई सरकारी विभाग इमारतों को अपने स्तर पर स्वयं मेंटेन करते हैं. लेकिन जब कभी रख-रखाव सही तरीके से नहीं किया जाता, ऐसी स्थिति में इमारत को नुकसान होता है."
टाउन एवं कंट्री प्लानिंग विभाग: राज्य की असुरक्षित इमारतों की पहचान पता लगाने के लिए चंडीगढ़ स्थित हरियाणा के टाउन एवं कंट्री प्लानिंग विभाग से संपर्क किया गया. यहां सीटीपी (आईटी) जितेंदर सिहाग से उनके कार्यालय में बातचीत की गई. उन्होंने बताया कि, "ऐसा कोई समग्र डाटा उनके पास नहीं है. किसी इमारत के संबंध में कोई परमिशन या नोटिस संबंधी कार्रवाई तो विभाग द्वारा की जाती है लेकिन विभाग की इमारतों को जर्जर घोषित करने की जिम्मेदारी विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर है. वहीं, इस संबंध में नगर निगम के पास भी असुरक्षित/जर्जर इमारतों का रिकॉर्ड मौजूद नहीं मिला."