Electricity Distribution License Haryana: सरकारी डिस्कॉम को कमजोर करने का आरोप, मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने की तैयारियों के खिलाफ हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने विरोध जताया है।

 
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हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह जिलों में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर विद्युत वितरण लाइसेंस देने की चल रही तैयारियों के खिलाफ बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी रोष देखा जा रहा है। भिवानी जिले के बवानीखेड़ा में सोमवार को आयोजित हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा की बैठक में नेताओं ने इस कदम को सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करने और बैक-डोर (पिछले दरवाजे) से निजीकरण का गंभीर प्रयास करार दिया है। मोर्चे ने इसके खिलाफ जनता के बीच जाकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का फैसला लिया है।

💰 मुनाफे वाले क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपने की साजिश: सरकारी डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति कमजोर होने की आशंका

बैठक में नेताओं ने स्पष्ट किया कि गुरुग्राम और नूंह वे क्षेत्र हैं जो राज्य के सरकारी डिस्कॉम को सबसे अधिक राजस्व (रेवेन्यू) प्रदान करते हैं। ऐसे अत्यधिक मुनाफे वाले क्षेत्रों को समानांतर लाइसेंस के माध्यम से किसी निजी कंपनी को सौंपने से सरकारी बिजली निगमों की आर्थिक स्थिति पर विपरीत असर पड़ेगा, जिसका सीधा नुकसान आम उपभोक्ताओं, किसानों और बिजली कर्मचारियों को उठाना पड़ेगा। नेताओं ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि कंपनी द्वारा अभी पूरी प्रक्रिया संपन्न होने से पहले ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करना कई संदिग्ध सवाल खड़े करता है।

📢 मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की अपील: चेतावनी दी कि पारदर्शी प्रक्रिया के बिना लाइसेंस दिया तो होगा कड़ा विरोध

संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने विद्युत नियामक आयोग से मांग की है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में निर्णय न लिया जाए तथा सभी कर्मचारी यूनियनों, उपभोक्ता संगठनों, किसानों और सरकारी डिस्कॉम के प्रतिनिधियों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाए। मोर्चे ने राज्य के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से इस गंभीर मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए बिना लाइसेंस जारी किया गया, तो प्रदेश के बिजली कर्मचारी, इंजीनियर और आम जनता मिलकर लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानूनी मंचों पर इसका कड़ा विरोध करेंगे।