हरियाणा में बिजली सुधार: 31 अगस्त से स्मार्ट मीटरिंग, बनेगी एग्री डिस्कॉम
ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने की विद्युत बजट समीक्षा। हरियाणा में 31 अगस्त से स्मार्ट मीटर, 'एग्री डिस्कॉम' का गठन और पीएम सूर्य घर योजना पर जोर। पढ़ें पूरी अपडेट।
चंडीगढ़ : केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विद्युत मंत्रालय के बजट की व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए ऊर्जा क्षेत्र में चल रही योजनाओं की प्रगति, बजट उपयोग और भविष्य की रणनीतियों का विस्तृत आकलन किया। बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं के व्यय, उपलब्धियों तथा आगामी लक्ष्यों की समीक्षा प्रस्तुत की। बैठक का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना, सभी प्रमुख योजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करना तथा भारत के ऊर्जा क्षेत्र में चल रहे सुधारों की गति को बनाए रखना रहा। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मजबूत, आधुनिक और उपभोक्ता-केंद्रित विद्युत व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।
संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि प्रत्येक योजना का बजट निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप खर्च हो तथा किसी भी परियोजना में अनावश्यक देरी न हो। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि योजनाओं की नियमित निगरानी करते हुए समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता को उसका सीधा लाभ मिल सके।
'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' को मिली सर्वोच्च प्राथमिकता
समीक्षा बैठक में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। हरियाणा में इस वर्ष 2.20 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें से अब तक लगभग 86 हजार सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। मनोहर लाल ने निर्देश दिए कि इस योजना का लाभ विशेष रूप से कम और मध्यम आय वर्ग के परिवारों तक पहुंचाया जाए, ताकि उनके बिजली बिल न्यूनतम अथवा शून्य हो सकें और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिले।
आरडीएसएस योजना से मजबूत होंगी बिजली वितरण कंपनियां
बैठक में पुनरुत्थान वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इस योजना का उद्देश्य राज्य की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को तकनीकी और वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है। इसके अंतर्गत बिजली वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाकर तकनीकी एवं वाणिज्यिक नुकसान (AT&C Losses) कम करने तथा राजस्व संग्रह बढ़ाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
हरियाणा में 31 अगस्त से बड़े स्तर पर स्मार्ट मीटरिंग अभियान
बैठक में हरियाणा के बिजली सुधार कार्यक्रमों को विशेष महत्व दिया गया। निर्णय लिया गया कि राज्य में लंबित स्मार्ट मीटरिंग परियोजनाओं को तेजी से पूरा करते हुए 31 अगस्त 2026 से बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य शुरू किया जाएगा। स्मार्ट मीटरों से उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग, वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी तथा बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण जैसे अनेक लाभ मिलेंगे।
चरणबद्ध तरीके से लागू होगी प्रीपेड मीटरिंग व्यवस्था
बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया गया।
पहले चरण में सरकारी कार्यालयों, सरकारी भवनों तथा सरकारी कर्मचारियों के आवासीय परिसरों में प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। इसके बाद 10 किलोवाट से अधिक लोड वाले औद्योगिक एवं व्यावसायिक उपभोक्ताओं को इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। स्वेच्छा से प्रीपेड मीटर अपनाने वाले उपभोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन देने की भी योजना बनाई जा रही है।
'नियर-जीरो पावर लॉस' होगा हरियाणा का अगला लक्ष्य
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2013-14 में हरियाणा में लाइन लॉस लगभग 34 प्रतिशत था, जिसे लगातार सुधारों के माध्यम से काफी कम किया जा चुका है। अब सरकार का लक्ष्य इसे लगभग शून्य (Near-Zero Power Loss) तक लाना है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, स्मार्ट मीटरिंग और निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।
भविष्य की बिजली मांग को देखते हुए दीर्घकालिक तैयारी
हरियाणा की वर्तमान अनुबंधित बिजली क्षमता 16,552 मेगावाट से अधिक है, जबकि इस वर्ष अनुमानित अधिकतम मांग 16,454 मेगावाट रहने का अनुमान है। हालांकि वर्ष 2029-30 तक बिजली की मांग बढ़कर लगभग 19,481 मेगावाट होने की संभावना है। इसे देखते हुए अभी से अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, पारेषण नेटवर्क तथा वितरण व्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति तैयार की जा रही है।
'हरियाणा एग्री डिस्कॉम' बनेगी किसानों के लिए समर्पित तीसरी बिजली कंपनी
राज्य में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए 'हरियाणा एग्री डिस्कॉम' के गठन की प्रक्रिया को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के बाद यह राज्य की तीसरी बिजली वितरण कंपनी होगी।
इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को निर्बाध और रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराना, कृषि क्षेत्र की विद्युत आवश्यकताओं का पृथक प्रबंधन करना तथा सरकार पर पड़ने वाले लगभग ₹7,000 करोड़ वार्षिक सब्सिडी भार का बेहतर वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
913 करोड़ से मजबूत होगा बिजली वितरण नेटवर्क
बैठक में हरियाणा के बिजली ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए ₹913 करोड़ की आधारभूत संरचना परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। इन परियोजनाओं के अंतर्गत उपकेंद्रों की क्षमता में 1,175 एमवीए की अतिरिक्त वृद्धि, नई लाइनें तथा SCADA और DMS जैसी आधुनिक रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणालियों की स्थापना की जाएगी, जिससे बिजली आपूर्ति में किसी भी प्रकार की खराबी का तुरंत पता लगाकर उसे शीघ्र ठीक किया जा सके।
सरकारी विभागों के बिजली बिलों की होगी स्वचालित वसूली
डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति को और मजबूत बनाने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के लंबित बिजली बिलों तथा सब्सिडी भुगतान के समयबद्ध निपटान हेतु ऑटोमेटेड भुगतान प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे बिजली कंपनियों का राजस्व समय पर प्राप्त होगा और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
विकसित भारत-2047 की ऊर्जा नीति को मिलेगी नई गति
बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों की निरंतर गति बनाए रखना समय की आवश्यकता है। किफायती बिजली उत्पादन, मजबूत पारेषण व्यवस्था, आधुनिक वितरण प्रणाली, नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार और उपभोक्ता-केंद्रित सेवाओं के माध्यम से देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बजट के प्रभावी उपयोग, स्मार्ट तकनीकों के विस्तार और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने से हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरा देश ऊर्जा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा तथा 'विकसित भारत-2047' के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

