मनी लॉन्ड्रिंग केस: पूर्व विधायक धर्म सिंह छोकर की जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक धर्म सिंह छोकर को जमानत देने से किया इनकार। 616 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग और घर खरीदारों से ठगी का है गंभीर आरोप।
Updated: Apr 10, 2026, 10:53 IST
चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हरियाणा कांग्रेस के पूर्व विधायक धर्म सिंह छोकर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपों, लेन-देन की प्रकृति और जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर इस स्तर पर उनकी रिहाई उचित नहीं है।
जस्टिस त्रिभुवन दहिया गुरुग्राम में दर्ज मूल अपराधों से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत कथित अपराध के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) की ओर से दायर शिकायत में नियमित जमानत की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। मामला महिरा समूह की एक कंपनी द्वारा शुरू की गई किफायती ग्रुप हाऊसिंग परियोजना से संबंधित था, जिस पर याची और उसके परिवार का नियंत्रण था। आरोप था कि घर खरीदारों से एकत्र की गई बड़ी रकम का गबन और दुरुपयोग किया गया।
यह भी आरोप था कि याची ने सह-आरोपियों के साथ मिल कर 616 करोड़ रुपए की अपराध की आय को गबन कर मनी लॉन्ड्रिंग की। याची ने तर्क दिया कि वह एक वरिष्ठ नागरिक है और समाज में उसकी गहरी पकड़ है। उसने जांच में सहयोग किया है और मुकद्दमे में काफी समय लगने की संभावना है। वहीं, प्रव र्तन निदेशालय ने आरोपों की गंभीरता, जांच के दौरान याची के आचरण और जमानत से संबंधित वैधानिक आवश्यकताओं का हवाला देते हुए इस दलील का विरोध किया।
कोर्ट ने गौर किया कि रिकॉर्ड में प्रस्तुत सामग्री से पता चलता है कि याची परियोजना में शामिल कई कंपनियों से जुड़ा हुआ था और वह उनके मामलों में सक्रिय रूप से शामिल था। कई बार कोर्ट में पेश नहीं हुआ, जिसके कारण गैर-जमानती वारंट जारी करने पड़े। जब उसे गिरफ्तार करने का प्रयास किया गया, तो वह कई बार अपने आवास पर नहीं मिला और अंततः दिल्ली के एक होटल से भागने का प्रयास करते समय उसे गिरफ्तार किया गया।
जस्टिस त्रिभुवन दहिया गुरुग्राम में दर्ज मूल अपराधों से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत कथित अपराध के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) की ओर से दायर शिकायत में नियमित जमानत की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। मामला महिरा समूह की एक कंपनी द्वारा शुरू की गई किफायती ग्रुप हाऊसिंग परियोजना से संबंधित था, जिस पर याची और उसके परिवार का नियंत्रण था। आरोप था कि घर खरीदारों से एकत्र की गई बड़ी रकम का गबन और दुरुपयोग किया गया।
यह भी आरोप था कि याची ने सह-आरोपियों के साथ मिल कर 616 करोड़ रुपए की अपराध की आय को गबन कर मनी लॉन्ड्रिंग की। याची ने तर्क दिया कि वह एक वरिष्ठ नागरिक है और समाज में उसकी गहरी पकड़ है। उसने जांच में सहयोग किया है और मुकद्दमे में काफी समय लगने की संभावना है। वहीं, प्रव र्तन निदेशालय ने आरोपों की गंभीरता, जांच के दौरान याची के आचरण और जमानत से संबंधित वैधानिक आवश्यकताओं का हवाला देते हुए इस दलील का विरोध किया।
कोर्ट ने गौर किया कि रिकॉर्ड में प्रस्तुत सामग्री से पता चलता है कि याची परियोजना में शामिल कई कंपनियों से जुड़ा हुआ था और वह उनके मामलों में सक्रिय रूप से शामिल था। कई बार कोर्ट में पेश नहीं हुआ, जिसके कारण गैर-जमानती वारंट जारी करने पड़े। जब उसे गिरफ्तार करने का प्रयास किया गया, तो वह कई बार अपने आवास पर नहीं मिला और अंततः दिल्ली के एक होटल से भागने का प्रयास करते समय उसे गिरफ्तार किया गया।

