Student Support Updates: पांच स्तरों पर होगी मानसिक तनाव के लक्षणों की पहचान, गंभीर मामलों में मनोवैज्ञानिकों की मिलेगी मदद
चंडीगढ़: स्कूली विद्यार्थियों को परीक्षा के भारी दबाव, तनाव, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरियाणा सरकार स्कूल स्तर पर एक सशक्त मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली शुरू करने जा रही है। प्रस्तावित ‘साथ’ (SAATH) परियोजना के तहत प्रदेश के 200 सरकारी स्कूलों में छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को विशेष मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता और पेशेवर परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। इस अभिनव पहल के तहत शिक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे बच्चों के व्यवहार में आने वाले मामूली बदलावों की समय रहते सटीक पहचान कर सकें।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बहुआयामी पहल में स्वास्थ्य एवं स्कूल शिक्षा विभाग के साथ-साथ शिक्षक, अभिभावक, छात्र स्वयंसेवक, परामर्शदाता, क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक संयुक्त रूप से मिलकर काम करेंगे। इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक तनाव के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचानना, उन्हें आवश्यक सहयोग देना और जरूरत पड़ने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
👥 122 परामर्शदाता और 400 शिक्षकों का विशेष नेटवर्क; व्यवहारिक बदलावों को पहचानने का मिलेगा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण और नेटवर्क का ढांचा:
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पेशेवर अमला: इस कल्याणकारी कार्यक्रम के लिए स्वास्थ्य विभाग के 122 अनुभवी परामर्शदाताओं को पेशेवर सहायता प्रदान करने के लिए चिह्नित किया गया है।
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शिक्षकों की भूमिका: इसके साथ ही प्रत्येक भागीदार स्कूल से दो योग्य शिक्षकों को नामित किया जाएगा, जिससे कुल मिलाकर लगभग 400 शिक्षकों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार होगा। मनोविज्ञान की शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले शिक्षक इस प्रक्रिया में रीढ़ की हड्डी साबित होंगे।
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पहचाने जाने वाले लक्षण: शिक्षकों को बच्चों में लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में भारी कमी, पढ़ाई में गिरता प्रदर्शन और स्कूल जाने से कतराने जैसे व्यवहारिक बदलावों को बारीकी से समझने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा अत्यधिक गेमिंग, सोशल मीडिया की लत, आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री, बुलिंग (उत्पीड़न) और नींद की कमी जैसी गंभीर समस्याओं पर भी पैनी नजर रखी जाएगी।
🌱 छोटे बच्चों के लिए भावनात्मक जागरूकता और किशोरावस्था के बदलावों पर विशेष जोर
जूनियर कक्षाओं के लिए रणनीति:
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कक्षा छठी से आठवीं: इस आयु वर्ग के विद्यार्थियों के लिए कार्यक्रम में भावनात्मक जागरूकता, आत्मविश्वास निर्माण, किशोरावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक व मानसिक बदलाव, परीक्षा का डर, बुलिंग और परिवार के साथ संवाद को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
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संवेदनशील संवाद: छोटे बच्चों को अपनी भावनाओं को खुलकर समझने और उन्हें सही ढंग से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। शिक्षकों को विशेष रूप से सिखाया जाएगा कि बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव आने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ उससे संवाद स्थापित किया जाए।
🎯 बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के भारी दबाव से निपटने के लिए व्यापक दृष्टिकोण
सीनियर कक्षाओं के लिए विशेष प्रबंध:
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कक्षा नौवीं से 12वीं: बड़े विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता का दायरा और अधिक व्यापक रखा गया है। इसमें बोर्ड परीक्षाओं और नीट-जेईएम जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं का मानसिक दबाव, भविष्य और करियर को लेकर अनिश्चितता, साथियों का दबाव (Peer Pressure), अवसाद के लक्षण, अस्वास्थ्यकर खान-पान और नशीले पदार्थों के सेवन के जोखिम को शामिल किया गया है।
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आत्महत्या रोकथाम: विद्यार्थियों में खुद को नुकसान पहुँचाने या आत्महत्या संबंधी विचारों के शुरुआती संकेतों की पहचान करने पर विशेष बल दिया जाएगा। ऐसे संवेदनशील मामलों में तत्काल विशेषज्ञ सहायता और उचित रेफरल (रिफर करने) की त्वरित व्यवस्था की जाएगी।
🔄 पांच स्तरों पर होगी पहचान और सहायता; अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित
मल्टी-लेवल सपोर्ट सिस्टम और अभिभावकों की भूमिका:
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पाँच चरण: विद्यार्थियों की समस्याओं की पहचान के लिए पांच स्तरीय तंत्र विकसित किया गया है। इसकी शुरुआत कक्षा शिक्षक से होगी जो दैनिक अवलोकन करेंगे। इसके बाद प्रशिक्षित शिक्षक स्क्रीनिंग करेंगे, जरूरत पड़ने पर किशोर-अनुकूल स्वास्थ्य क्लीनिक (AFLC) भेजा जाएगा, और गंभीर मामलों में मनोचिकित्सकों की मदद ली जाएगी।
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अभिभावक-शिक्षक संवाद: इस पहल में माता-पिता की भागीदारी भी अनिवार्य की गई है। पीटीएम (PTM) बैठकों के दौरान अभिभावकों को बच्चों की मनोदशा, नींद और पढ़ाई में आने वाले बदलावों को समझने के गुर सिखाए जाएंगे। साथ ही, वरिष्ठ विद्यार्थियों को 'साथ समन्वयक' के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी ताकि वे अपने साथियों के बीच सकारात्मक और सहयोगी माहौल बना सकें।