School Cadre Lecturers Association Haryana: हरियाणा शिक्षा विभाग के 130 करोड़ के बजट और माइक्रो प्लान पर उठे सवाल
पंचकूला: हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग का प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाने के लिए राज्यव्यापी अभियान जारी है. इसके तहत प्रदेश के 14,300 से अधिक सरकारी विद्यालयों निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और भौतिक ढांचे की स्थिति का आकलन किया गया है. इस काम के लिए जिला व ब्लॉक स्तर के अधिकारियों सहित तकनीकी विशेषज्ञों समेत विभिन्न पदाधिकारियों को भी शामिल किया गया. सरकार के अनुसार मुख्यालय स्तर के अधिकारियों ने भी समय-समय पर स्कूलों का दौरा किया.
"माइक्रो प्लान" तैयार किया गया : नतीजतन, स्कूलों वास्तविक आवश्यकताओं को समझते हुए एक विशेष "माइक्रो प्लान" तैयार किया गया है, ताकि विकास कार्य करवाए जा सकें. लेकिन प्रदेश सरकार के इस दावे पर हरियाणा के शिक्षा संगठनों ने सवाल खड़े किए हैं. स्कूल कैडर लेक्चरर्स एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश सरकार स्कूल संबंधी विकास कार्यों को केवल कागजों में ही आगे बढ़ता दिखा रही है, जबकि हकीकत कुछ और है.
मरम्मत के बजाय सफेदी से लीपापोती: स्कूल कैडर लेक्चरर्स एसोसिएशन के राज्य महासचिव अनिल सैनी ने कहा कि, "प्रदेश सरकार की ओर से स्कूलों के विकास कार्यों, आवश्यक सुधारों सहित छोटे-बड़े मरम्मत कार्यों के लिए करोड़ों रुपये का खर्च करने का मसौदा तैयार किया है. लेकिन इससे पहले शिक्षा विभाग के किन्हीं भी पदाधिकारियों द्वारा प्रदेश शिक्षा संगठनों से कोई बातचीत नहीं की गई. प्रदेश सरकार केवल कागजों में ही स्कूलों का कायाकल्प दिखाने के प्रयास में है. क्योंकि अनेक स्कूलों में मरम्मत कार्य दिखाई देता है. पहले भी स्कूलों में मरम्मत करने के बजाय खामियों को केवल सफेदी करके ढका गया. नतीजतन, असल काम की स्थिति जस की तस बनी दिखाई देती है."
शिक्षक संगठनों से सुझाव की मांग: स्कूल कैडर लेक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव अनिल सैनी ने आगे कहा कि, "प्रदेश सरकार की ओर से केवल स्कूलों के किए जाने वाले कामकाज के लिए स्कूल स्तर पर सूचना मांगी गई है. लेकिन इस संबंध में किसी भी शिक्षक संगठन से कोई बैठक नहीं की गई. कई बार शिक्षा मुख्यालय से सीधा ठेका दे दिया जाता है लेकिन स्कूलों को अवगत नहीं कराया जाता. हमारी शिक्षा विभाग से मांग है कि किसी भी कार्यों की शुरूआत से पहले शिक्षक संगठनों से सुझाव ले."
2800 कार्यों के लिए 130 करोड़: हरियाणा शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश भर में लगभग 2800 विकास कार्यों एवं आवश्यक सुधारों को चिन्हित किया गया है. इनमें पुराने व जर्जर भवनों को हटाना, नए कमरों का निर्माण, चारदीवारी, नए शौचालय और छोटे-बड़े मरम्मत कार्य शामिल हैं. विभाग ने इन कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना बनाकर प्रथम चरण के लिए 130 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. विद्यार्थियों के लिए बेहतर स्वच्छता सुनिश्चित करने और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सुगम माहौल देने के लिए 11.01 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है. इसके तहत लड़कों के 484 नए शौचालय, लड़कियों के लिए 173 नए शौचालय, 97 दिव्यांग-अनुकूल शौचालय, 51 रैंप निर्माण और मौजूदा शौचालयों का जीर्णोद्धार एवं मरम्मत कार्य शामिल है. राज्य में निपुण कार्यक्रम, सुपर 100, कौशल विकास और फ्रेंच व जर्मन भाषा शिक्षण जैसे नवाचार संचालित किए जा रहे हैं.
गुणवत्ता बेहतर होने का दावा: शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि, "हरियाणा संस्कृति मॉडल स्कूल, सीएम- ईईई स्कूल और पीएमश्री स्कूलों के माध्यम से आधुनिक अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दी जा रही है. बोर्ड परीक्षा परिणामों में लगातार सुधार होने के आधार पर सरकारी विद्यालय गुणवत्ता में किसी से पीछे नहीं होने की बात कही गई है."
गैर-शैक्षणिक कामकाज से बनी चिंता: स्कूल कैडर लेक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान अशोक और राज्य महासचिव अनिल सैनी ने कहा कि लंबे समय से स्कूली शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया गया है. इससे लोग अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराने से गुरेज करते हैं. जब शिक्षक गैर-शैक्षणिक कार्यों के चलते कई-कई दिनों तक कक्षाओं से दूर रहेंगे तो रिजल्ट बेहतर लाने में चुनौती बनी रहेगी. उन्होंने शिक्षा विभाग से शिक्षा में सुधार के लिए सलाह संगठन से सुझाव जरूर लिए जाने की बात कही.
समस्याओं से सरकारी शिक्षा पद्धति कमजोर: राज्य महासचिव अनिल सैनी ने कहा कि, "प्रदेश में शिक्षकों के रिक्त पद काफी हैं. जिस कारण शिक्षा पद्धति कमजोर पड़ रही है. इसके अलावा स्कूलों का वर्गीकरण करने समेत शिक्षा के अंगेजी व हिन्दी के माध्यम भी अलग-अलग हैं. एक शिक्षक के लिए दोनों माध्यमों से शिक्षा देना चुनौती बना रहता है, जिस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए. प्रदेश सरकार को हरियाणा बोर्ड को प्राथमिकता देनी चाहिए और सभी छात्रों के लिए एक जैसी शिक्षा और एक बोर्ड रहना चाहिए."
ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव से परेशानी: ट्रांसफर पॉलिसी पर जोन सिस्टम लागू किया गया था, जिसे बदलकर ब्लॉक सिस्टम लागू किया गया. लेकिन अब स्कूल स्तर पर ही पांच वर्षों का ठहराव तय किया गया है. जबकि शिक्षक संगठनों की ओर से मांग की गई थी कि जोन सिस्टम पर ट्रांसफर किए जाएं लेकिन विभाग द्वारा इसे स्वीकार नहीं किया गया. इससे शिक्षकों में नाराजगी है. क्योंकि न तो इसमें ग्रामीण सेवा को लिया गया, न शहरी सेवा को लिया गया और न जोन सिस्टम रखा गया है. इसके अलावा कपल केस के अंक भी दस-दस दिए गए हैं, जिससे शिक्षकों में विरोधाभास है. मेरा अनुरोध है कि प्रदेश के जितने भी संगठन हैं, उनके तीन महीने में एक बैठक आयोजित कर समस्याओं पर विचार-चर्चा कर समाधान किए जाएं."