हरियाणा गेस्ट टीचर रेगुलर मामला: हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस, जानें अपडेट

हरियाणा में गेस्ट टीचरों को नियमित करने के आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती। पुनर्विचार याचिका पर कोर्ट ने संबंधित पक्षों को भेजा नोटिस। 9 सितंबर को होगी अगली सुनवाई।

 
हाईकोर्ट नोटिस

चंडीगढ़  : पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की एकल बेंच ने गेस्ट टीचरों को रेगुलर करने तथा समस्त लाभ देने के आदेशों के बाद दायर की गई याचिका को स्वीकार करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करके जवाब मांग लिया है। यह फैसला बीती 25 मई को दिया गया था। जिसे लेकर दलीप सिंह व अन्य द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी। मामले पर आगामी सुनवाई 9 सितम्बर को होगी।

हुड्डा सरकार में वर्ष 2005-2006 में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 3 महीनों के लिए शिक्षण हेतु गेस्ट टीचर्स रखने की नीति बनाई गई थी और स्कूल मुखिया के स्तर पर ही गांव के ही युवाओ को प्राथमिकता देते हुए नियुक्तियाँ हुई थी। इन नियुक्तियों में स्कूल मुखियाओं द्वारा अनियमितताएं किये जाने के भी काफी मामले सामने आये थे और विभागीय जांच में 719 से ज्यादा गेस्ट टीचर्स की नियुक्तियों में अनियमितता मिली थी।

याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा कि वर्ष 2006 ले कर अब तक अनेक बार हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने गेस्ट टीचर्स के संदर्भ में व्यापक फैसले दिए हुए है। जिनके बारे में हाईकोर्ट को गेस्ट टीचर्स व सरकारी पक्ष ने मामले की सुनवाई के दौरान नहीं बताया और कोर्ट से तथ्यों को छुपाया गया जिसके चलते कोर्ट ने गेस्ट टीचर्स को समस्त लाभ सहित रेगुलर करने का ऑर्डर कर दिया।

याची पक्ष ने बहस करते हुए बताया कि सीमा देवी केस में हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने यंहा तक लिखा है कि सरकार व गेस्ट टीचर्स आपस में मिले हुए है। सुनवाई उपरांत बेंच ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जबाव देने को कहा है। हाईकोर्ट में दायर इस पुनर्विचार याचिका में गेस्ट टीचर्स के संबंध में बलराज, बलदेव, दलीप सिंह, अशोक कुमार, तिलकराज, महेंद्र सिंह इत्यादि केस में हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई कड़ी टिप्पणियों व फैसलों को बताया गया है और आदेशों को रिकॉर्ड पर रखा गया है।

याचिका में बताया गया कि हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के अनेक फैसलों के मद्देनजर नियमित भर्ती पूरी होने के बाद गेस्ट टीचर्स को सेवा से मुक्त करने के आदेशों की पालना करने की बजाय सरकार ने इनको 58 साल तक की सेवा सुरक्षा देने का भी 2019 में एक्ट बना दिया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार गेस्ट टीचर्स को वरिष्ठता का लाभ मिलने से शिक्षा विभाग में हजारों जेबीटी, टीजीटी व पीजीटी प्रभावित होंगे और पदोन्नत शिक्षकों को रिवर्ट भी होना पड़ेगा।