IAS Success Story: एक ही परिवार की तीन सगी बहनें, जो तीनों बनीं हरियाणा की मुख्य सचिव; मीनाक्षी, उर्वशी और केशनी की बेमिसाल कहानी

भारत के प्रशासनिक इतिहास का दुर्लभ उदाहरण! हरियाणा की तीन सगी बहनें—मीनाक्षी आनंद चौधरी, उर्वशी गुलाटी और केशनी आनंद अरोड़ा—न केवल IAS बनीं, बल्कि तीनों ने राज्य के सर्वोच्च पद 'मुख्य सचिव' की जिम्मेदारी संभाली। जानें महिला सशक्तिकरण की इस अनूठी मिसाल की पूरी कहानी।

 
Female Chief Secretaries of Haryana

चंडीगढ़ : भारत में यह एक दुर्लभ उदाहरण है कि एक ही परिवार की तीन बहनें आई ए अधिकारी बनीं और तीनों ने राज्य के मुख्य सचिव पद को संभाला। यह उपलब्धि हरियाणा के प्रशासनिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।

तीनों आई. ए. एस. बहनें — मीनाक्षी आनंद चौधरी, उर्वशी गुलाटी और केशनी आनंद अरोड़ा प्रशासनिक उत्कृष्टता, अनुशासन और महिला नेतृत्व की मिसाल हैं। भले ही तीनों सेवानिवृत्त हो चुकी हैं मगर इनका रिकॉड कोई भी नहीं तोड़ पाया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन अपने-आप में असाधारण उपलब्धि मानी जाती है, लेकिन जब एक ही परिवार की तीन सगी बहनें इस सर्वोच्च सेवा तक पहुंचें और राज्य के सबसे बड़े प्रशासनिक पद मुख्य सचिव तक का सफर तय करें, तो यह उपलब्धि इतिहास में दर्ज हो जाती है। हरियाणा की ये तीन बहनें — मीनाक्षी आनंद चौधरी, उर्वशी गुलाटी और केशनी आनंद अरोड़ा न केवल प्रशासनिक दक्षता की प्रतीक हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल भी हैं। इन तीनों का करियर यह दर्शाता है कि कड़ी मेहनत, अनुशासन, पारिवारिक संस्कार और सेवा भावना के साथ कोई भी व्यक्ति सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकता है।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा

तीनों बहनों का पालन-पोषण ऐसे वातावरण में हुआ, जहां शिक्षा, ईमानदारी और समाज सेवा को सर्वोच्च मूल्य माना गया। प्रारंभ से ही तीनों का लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाकर देश और समाज के लिए कार्य करना रहा। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर अलग-अलग वर्षों में IAS में चयन पाया।

मीनाक्षी आनंद चौधरी – प्रशासन में दृढ़ता और अनुशासन की पहचान रही हैं। मीनाक्षी आनंद चौधरी हरियाणा की पहली महिला मुख्य सचिव बनीं। उनके कार्यकाल को सख्त प्रशासनिक अनुशासन, तेज निर्णय प्रक्रिया और शहरी प्रशासन में सुधारों के लिए जाना जाता है। उन्होंने एस डी एम,ए डी सी,उपायुक्त जैसे फील्ड पदों से लेकर सचिवालय स्तर तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। शहरी स्थानीय निकायों, नगर निगम व्यवस्था और ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में उनके योगदान को विशेष रूप से सराहा गया।उनकी कार्यशैली में स्पष्टता, पारदर्शिता और जवाबदेही प्रमुख रही। वे मानती थीं कि प्रशासन का मूल उद्देश्य आम नागरिक तक समय पर और गुणवत्तापूर्ण सेवा पहुंचाना है।

उर्वशी गुलाटी – संतुलित नेतृत्व और सामाजिक सरोकार बनी।उर्वशी गुलाटी का प्रशासनिक सफर सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास तथा मानव संसाधन विकास से गहराई से जुड़ा रहा। उन्होंने भी फील्ड प्रशासन से लेकर उच्च स्तर तक विभिन्न पदों पर कार्य किया और बाद में हरियाणा की मुख्य सचिव बनीं।उनकी पहचान एक शांत, संतुलित और परामर्श आधारित प्रशासक के रूप में रही। महिला सशक्तिकरण, पोषण, बालिका शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।उन्होंने यह सिद्ध किया कि संवेदनशीलता और दृढ़ता साथ-साथ चल सकती है।

केशनी आनंद अरोड़ा – परिणामोन्मुख और तकनीक आधारित प्रशासन

केशनी आनंद अरोड़ा तीनों बहनों में सबसे छोटी हैं, लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती हैं। वे भी हरियाणा की मुख्य सचिव बनीं और अपने कार्यकाल में डिजिटल गवर्नेंस, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार-निरोधक उपायों पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने निवेश-अनुकूल माहौल बनाने, उद्योगों को प्रोत्साहन देने और शासन में तकनीक के उपयोग को बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाए। उनकी कार्यशैली को परिणामोन्मुख कहा जाता है।कोविड के दौरान चीफ सैक्ट्री रहते इनकी अत्यंत कुशल व सक्रिय भूमिका की सभी ने सराहना की।

महिला सशक्तिकरण में ऐतिहासिक योगदान

तीनों बहनों ने अपने-अपने कार्यकाल में महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी।महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करना शामिल है।कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। बालिका शिक्षा और पोषण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना महिला उद्यमिता को नीति स्तर पर समर्थन इन सभी प्रयासों ने हरियाणा में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दी। मीनाक्षी आनंद चौधरी, उर्वशी गुलाटी और केशनी आनंद अरोड़ा की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि ईमानदारी + मेहनत + सेवा भावना = सफल और सम्मानित प्रशासनिक जीवन ये तीनों बहनें आज भी लाखों युवाओं, विशेषकर बेटियों, के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और यह साबित करती हैं कि महिलाएं नेतृत्व के हर शिखर को छू सकती हैं।