हरियाणा में आज से महंगे हुए प्लॉट: कलेक्टर रेट में 75% तक की भारी बढ़ोतरी
हरियाणा के 14 तहसीलों में नए कलेक्टर रेट लागू। गुरुग्राम, सोनीपत और रेवाड़ी समेत कई जिलों में जमीन 75% तक महंगी। जानें अपने शहर के रिहायशी और कमर्शियल रेट।
प्रदेश की 14 तहसीलों और उप तहसीलों में बुधवार यानी आज से नए कलेक्टर रेट लागू हो जाएंगे। जहां ज्यादा लेनदेन हुआ है, उन स्थानों पर सरकार ने अधिक कलेक्टर रेट बढ़ाए हैं। प्रदेश के 7.43 फीसदी यानी कुल 11,947 क्षेत्रों में 75 फीसदी तक कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी की गई है।
गुरुग्राम के सेक्टर-28 में रिहायशी संपत्ति 2024 में 71,600 रुपये प्रति वर्गगज थी। बीते साल इसमें 30 फीसदी बढ़ोतरी हुई थी और यह 93,080 रुपये प्रति वर्ग हो गई थी। अब 45 फीसदी बढ़ोतरी से इसकी कीमत 1,34,944 रुपये वर्ग गज हो जाएगी।
इसी तरह बहादुरगढ़ में टीचर कॉलोनी, रणजीत कॉलोनी, भगवान कॉलोनी में रेट महंगे हुए हैं। हालांकि, कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में 130 फीसदी बढ़ोतरी को घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। जींद में फव्वारा चौक, अपोलो रोड, डिफेंस कॉलोनी में व्यावसायिक भूमि के रेट 20 फीसदी तक बढ़ाए गए हैं।
रेवाड़ी में धारूहेड़ा क्षेत्र के अलावलपुर, आसदपुर, खटावली, महेश्वरी और कापड़ीवास आदि गांवों में 45 से 60 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। सोनीपत में कृषि भूमि में अधिक खरीद-फरोख्त हुई है। ऐसे में इन्हीं क्षेत्रों में 15 से 75 फीसदी तक दाम बढ़े हैं। यमुनानगर में फव्वारा चौक से कमानी चौक तक व्यवसायिक जमीन में 75 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। यहां 90,800 रुपये प्रति वर्ग से 1,58,900 रुपये प्रति वर्ग गज तक दाम हो गए हैं।
इसी तरह पानीपत में जीटी रोड पर करनाल की तरफ करीब 60 से 75 प्रतिशत तक रेट बढ़ाए हैं। करनाल रोड पर सर्वाधिक प्रति वर्ग गज 17 हजार की बढ़ोतरी हुई है। कुरुक्षेत्र में सबसे ज्यादा इस्माईलाबाद में 75 फीसदी तक रेट बढ़े हैं। करनाल में 75 फीसदी तक रेट बढ़ाए गए हैं। वहीं, कैथल में अभी नए रेट पोर्टल पर अपडेट नहीं हो सके हैं। अंबाला के सेक्टरों में रिहायशी व व्यावसायिक भूमि के रेट 75 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।
नौ माह पहले बढ़े थे रेट
साल 2025 में 1 अगस्त को कलैक्टर रेट में बढ़ोतरी हुई थी। नौ माह बाद फिर से कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी के पीछे सरकार के राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग ने तर्क दिया है कि सभी क्षेत्रों की 50 फीसदी रजिस्ट्रियों का विश्लेषण होना है। राजस्व विभाग के मुताबिक, कलेक्टर रेट में संशोधन एक फॉर्मूला आधारित है। जिन क्षेत्रों में कम, मध्यम और सर्वाधिक रजिस्ट्री होती हैं उसी के अनुसार स्लैब तैयार किया जाता है।

