Economic Growth Haryana: अप्रैल से सितंबर के बीच नेट SGST संग्रह 29,108 करोड़ पहुंचा, देश में मिला दूसरा स्थान
हरियाणा ने सितंबर 2026 में 4,445 करोड़ रुपये के नेट SGST संग्रह के साथ मजबूत वृद्धि दर्ज की है। छह महीने में संग्रह 29,108 करोड़ तक पहुंच गया है।
चंडीगढ़: हरियाणा ने राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) के संग्रह में सितंबर 2026 के दौरान मजबूत वृद्धि दर्ज की है. सितंबर में राज्य का नेट SGST संग्रह 4,445 करोड़ रुपये रहा, जबकि सितंबर 2025 में यह 3,884 करोड़ रुपये था. यानी एक साल में संग्रह में 561 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और वृद्धि दर करीब 14 प्रतिशत रही.
छह महीने में 29,108 करोड़: अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच हरियाणा का नेट SGST संग्रह 29,108 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि यानी अप्रैल-सितंबर 2025 में यह आंकड़ा 23,058 करोड़ रुपये था. इस तरह छह महीने में राज्य के नेट SGST संग्रह में करीब 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में नेट SGST संग्रह की वृद्धि दर के मामले में हरियाणा देश में दूसरे स्थान पर रहा.
राजस्व बढ़ने के पीछे अनुपालन पर जोर: राज्य के कर राजस्व में लगातार हो रही वृद्धि को आर्थिक गतिविधियों में मजबूती और कर अनुपालन सुधार के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है. आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए आंकड़ा विश्लेषण और तकनीक आधारित निगरानी पर जोर दिया जा रहा है.
डेटा से संभावित राजस्व नुकसान की पहचान: विभाग द्वारा कर संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर ऐसे मामलों की पहचान की जा रही है, जहां संभावित राजस्व नुकसान की आशंका हो सकती है. इसके बाद लक्षित कर अनुपालन उपायों के माध्यम से करदाताओं को नियमों के अनुरूप लाने और राजस्व संग्रह को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है.
तकनीक आधारित निगरानी से सुधार: विभाग का फोकस केवल संग्रह बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कर प्रणाली में अनुपालन को मजबूत करने पर भी है. तकनीक और डेटा एनालिटिक्स के इस्तेमाल से संदिग्ध लेनदेन तथा अनुपालन से जुड़े मामलों की निगरानी की जा रही है. इससे कर आधार को मजबूत करने और राजस्व रिसाव की संभावनाओं को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
सरकार ने प्रयासों को बताया अहम: आबकारी एवं कराधान विभाग के अनुसार कि, "आंकड़ा विश्लेषण, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी और लक्षित कर अनुपालन उपायों के माध्यम से संभावित राजस्व हानि की पहचान की जा रही है. कर अनुपालन को मजबूत करना विभाग की प्राथमिकता है. इन प्रयासों के साथ राज्य में कर संग्रह को और बेहतर बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है."