हरियाणा में सौर ऊर्जा का विस्तार: घर बैठे मिलेगी मुफ्त बिजली, पढ़ें योजना
हरियाणा में 2027 तक 2.20 लाख रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने का लक्ष्य। जानें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में सब्सिडी और अनिल विज के इस ऊर्जा अभियान की पूरी जानकारी।
चंडीगढ़ : ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आज किसी भी राज्य के विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। बिजली की बढ़ती मांग, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच हरियाणा ने सौर ऊर्जा को भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाए हैं।
ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज के नेतृत्व में प्रदेश में सौर ऊर्जा के विस्तार को नई गति मिली है। सरकार का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और हरित विकास को बढ़ावा देना है।
हरियाणा का बड़ा लक्ष्य
हरियाणा सरकार ने वर्ष 2027 तक लगभग 2.20 लाख रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके माध्यम से हजारों मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। यह अभियान केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के साथ समन्वय में आगे बढ़ रहा है।
राज्य सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक परिवार अपने घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली का उत्पादन स्वयं करें। इससे बिजली वितरण तंत्र पर दबाव कम होगा और उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आएगी।
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का लाभ
इस योजना के तहत पात्र परिवारों को रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने पर केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी प्रदान की जाती है। सामान्यतः 1 किलोवाट से 3 किलोवाट तक के घरेलू संयंत्रों पर 30,000 से 78,000 तक की केंद्रीय सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है। योजना का उद्देश्य देशभर में 1 करोड़ घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ना है।
हरियाणा में बढ़ती सौर क्षमता
हरियाणा में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि हो रही है। सरकारी भवनों, विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, पंचायत भवनों, अस्पतालों और निजी आवासों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे उद्योगों की ऊर्जा लागत कम करने में मदद मिल रही है।
अनिल विज की सक्रिय भूमिका
ऊर्जा मंत्री अनिल विज नियमित रूप से हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (HAREDA) तथा बिजली वितरण निगमों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। उनका विशेष जोर तीन बिंदुओं पर है—
पात्र उपभोक्ताओं के आवेदनों का शीघ्र निस्तारण। गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध सोलर संयंत्र स्थापना। सब्सिडी और नेट मीटरिंग प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाना। उनका मानना है कि सौर ऊर्जा को जन-आंदोलन बनाए बिना ऊर्जा आत्मनिर्भरता का लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सकता।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार एक 3 किलोवाट का घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्र वर्ष में लगभग 3,500 से 4,500 यूनिट बिजली उत्पन्न कर सकता है। इससे परिवारों के बिजली बिल में बड़ी बचत होती है और प्रति वर्ष लगभग 3 से 4 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने में भी सहायता मिलती है। बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा अपनाने से राज्य के कार्बन फुटप्रिंट में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
रोजगार के नए अवसर
सौर ऊर्जा क्षेत्र केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके विस्तार से इंजीनियरों, तकनीशियनों, इंस्टॉलेशन एजेंसियों, उपकरण निर्माताओं और रखरखाव सेवाओं में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। हरियाणा सरकार का मानना है कि हरित ऊर्जा भविष्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बनेगी।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि सौर ऊर्जा के विस्तार की राह में कुछ चुनौतियां भी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, शुरुआती निवेश को लेकर लोगों की आशंकाएं, तकनीकी जानकारी का अभाव तथा नेट मीटरिंग की प्रक्रिया को लेकर भ्रम जैसी समस्याएं अभी भी मौजूद हैं। सरकार इन चुनौतियों को जन-जागरूकता अभियानों और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से दूर करने का प्रयास कर रही है।
भविष्य की दिशा
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हरियाणा अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय पर प्राप्त कर लेता है, तो आने वाले वर्षों में वह देश के अग्रणी सौर ऊर्जा राज्यों में शामिल हो सकता है। इससे न केवल बिजली क्षेत्र मजबूत होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी बल मिलेगा।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज के नेतृत्व में हरियाणा सौर ऊर्जा को एक व्यापक जन-अभियान का स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रूफटॉप सोलर, सरकारी प्रोत्साहन, पारदर्शी व्यवस्था और जनभागीदारी के माध्यम से प्रदेश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ा रहा है। यदि यही गति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में हरियाणा स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकता है।

