हरियाणा: कचरा प्रबंधन पर सरकार सख्त, 7.63 करोड़ का जुर्माना वसूला
हरियाणा सरकार का कचरा प्रबंधन पर कड़ा रुख। एनजीटी में शपथपत्र देकर बताया- 3,486 चालान और 7.63 करोड़ का जुर्माना वसूला। 60 डंप साइट्स को बायो-माइनिंग से किया साफ।
चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के प्रभावी पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दायर शपथपत्र में सरकार ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों से अब तक 7.63 करोड़ रुपये से अधिक का पर्यावरणीय मुआवजा (ग्रीन सेस) वसूला गया है तथा 3,486 चालान किए गए हैं। इसके साथ ही राज्य में पुराने कचरा डंपिंग स्थलों के वैज्ञानिक निस्तारण और आधुनिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था को तेजी से लागू किया जा रहा है।
एनजीटी में सरकार का विस्तृत जवाब
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के संयुक्त निदेशक (प्रशासन) की ओर से राष्ट्रीय हरित अधिकरण में दायर शपथपत्र में राज्य सरकार ने ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के अनुपालन को लेकर उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी है। यह मामला रेवाड़ी के पर्यावरण कार्यकर्ता प्रकाश यादव द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें धारूहेड़ा और साहिबी नदी क्षेत्र में अवैध कचरा डंपिंग और प्रदूषण का मुद्दा उठाया गया था। बाद में यह मामला पूरे हरियाणा में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा तक पहुंच गया।
75 में से 60 लीगेसी वेस्ट डंप साइट साफ
सरकार ने शपथपत्र में बताया कि राज्य की 75 लीगेसी वेस्ट डंप साइटों में से 60 का बायो-माइनिंग तकनीक के माध्यम से वैज्ञानिक निस्तारण किया जा चुका है। शेष 15 स्थलों को 31 मार्च 2027 तक वैज्ञानिक तरीके से कैपिंग अथवा पूरी तरह साफ करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
87 शहरी निकायों के लिए एकीकृत कचरा प्रबंधन योजना
कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार जिला स्तर पर सिंगल ई-टेंडर मॉडल लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत अलग-अलग नगर निकायों की बजाय जिला स्तर पर एकीकृत टेंडर जारी होंगे। सरकार ने 87 शहरी स्थानीय निकायों के लिए वेस्ट प्रोसेसिंग स्थलों की पहचान भी कर ली है, जिससे कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था मजबूत होगी।
105 कंपनियां ईपीआर व्यवस्था के दायरे में
सरकार के अनुसार 105 कंपनियों को एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (ईपीआर) फ्रेमवर्क के तहत शामिल किया गया है। इनमें 23 निर्माता, 61 आयातक और 21 ब्रांड मालिक शामिल हैं। अब इन कंपनियों पर प्लास्टिक एवं पैकेजिंग कचरे के संग्रह, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक निस्तारण की जिम्मेदारी तय होगी।
पांच साल के लिए होंगे स्वच्छता सेवाओं के टेंडर
हरियाणा के विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि राज्य में स्वच्छता सेवाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। पहले जहां टेंडर केवल एक वर्ष के लिए जारी किए जाते थे, वहीं अब इन्हें पांच वर्ष की अवधि के लिए दिया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे कचरा प्रबंधन में निरंतरता, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ेगी तथा शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी।

