Haryana Sukanya Samriddhi Yojana: 10 साल बाद भी सुकन्या खातों में पीछे हरियाणा, गुरुग्राम-फरीदाबाद में सबसे कम खुले खाते
हरियाणा में सुकन्या समृद्धि योजना के 10 साल बाद भी हालात सुस्त। 24 लाख पात्र बच्चियों में से केवल 10 लाख के खुले खाते, जानिए जिलों की रिपोर्ट।
देश में बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से शुरू की गई छोटी बचत की महत्वपूर्ण 'सुकन्या समृद्धि योजना' (SSY) को लेकर हरियाणा से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के ऐतिहासिक पानीपत शहर से "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" अभियान के तहत इस योजना का शुभारंभ किया गया था, लेकिन विडंबना यह है कि आज भी प्रदेश के लोग इस लाभकारी योजना का अपेक्षित लाभ उठाने में पीछे चल रहे हैं।
📊 गुरुग्राम और फरीदाबाद डिवीजन में सबसे कम खुले खाते: 24 लाख पात्र बच्चियों में से 13.71 लाख का अंतर
डाकघर के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, सितंबर 2026 तक प्रदेश भर में 0 से 10 वर्ष तक की बच्चियों की कुल अनुमानित संख्या करीब 24,02,970 है। इसके मुकाबले सुकन्या समृद्धि योजना के तहत कुल 10,31,083 खाते ही खुल पाए हैं, जिससे साफ है कि अभी भी 13,71,887 का बड़ा अंतर बना हुआ है। प्रदेश भर में सबसे कम एसएसवाई खाते गुरुग्राम डिवीजन (गुरुग्राम, नूंह, रेवाड़ी) और फरीदाबाद डिवीजन (फरीदाबाद, पलवल) में दर्ज किए गए हैं, जहां प्रति 100 पात्र लड़कियों पर मात्र 26 से 27 प्रतिशत खाते ही खुल सके हैं।
🏛️ मात्र दस जिलों में ठीक-ה स्थिति: अंबाला, भिवानी, कुरुक्षेत्र और रोहतक डिवीजनों में बेहतर रुझान
डाक विभाग के अनुसार, अंबाला, भिवानी, कुरुक्षेत्र और रोहतक डिवीजन के अंतर्गत आने वाले कुछ जिलों—जैसे पंचकूला, यमुनानगर, चरखी-दादरी, महेंद्रगढ़, कैथल और झज्जर में जरूर लोगों ने अपनी 0 से 10 वर्ष की बच्चियों के खाते खुलवाने में थोड़ी रुचि दिखाई है। हालांकि, कुल 22 डिवीजनों वाले इस बड़े राज्य में अधिकांश जगहों पर आज भी जागरूकता की भारी कमी और उदासीनता साफ देखने को मिलती है।
🔍 विशेषज्ञों की राय और योजना के मुख्य उद्देश्य: जागरूकता की कमी और सामाजिक सोच
इस विषय पर शिक्षाविदों का मानना है कि लोगों में योजना की सही जानकारी का अभाव और अभी भी समाज में रूढ़िवादी सोच का बने रहना इसका मुख्य कारण है। जानकारों का सुझाव है कि यदि स्कूलों के स्तर पर बेटियों के खाते अनिवार्य रूप से खोले जाएं, तो इस लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं के भविष्य को आर्थिक रूप से मजबूत करना, उच्च शिक्षा व विवाह के लिए बचत को बढ़ावा देना और वर्तमान में 8.2% वार्षिक आकर्षक ब्याज व टैक्स छूट का लाभ देना है।