Inspiring: 17 साल से खेती संभाल रही बबीता, ट्रैक्टर चलाकर सरसों बेचने मंडी पहुँची

आर्य नगर की बबीता ने मिसाल पेश की! पिता के निधन के बाद 13 एकड़ खेती और घर की कमान संभाली। खुद ट्रैक्टर चलाकर 120 क्विंटल सरसों लेकर ढिगावा मंडी पहुँची महिला किसान।

 
लोहारू आर्य नगर न्यूज़

फौजी पिता के निधन के बाद पिछले 17 साल से गृहस्थी और खेतीबाड़ी की कमान संभाल रही आर्य नगर की बबीता ट्रैक्टर चलाकर अपनी सरसों की फसल बेचने ढिगावा मंडी पहुंची तो हर कोई हैरान रह गया। जैसे ही बबीता ट्रैक्टर का स्टेयरिंग संभालकर पीछे सरसों से भरी ट्रॉली लेकर मंडी गेट पर पहुंची तो वहां मौजूद कर्मचारी भी हैरान रह गए।

इस इलाके में अब तक मंडी में पुरुष किसानों को ही फसल लाते देखा जाता था लेकिन पहली बार एक महिला किसान को खुद ट्रैक्टर चलाकर फसल बेचने पहुंचते देख सभी अचंभित रह गए। गांव आर्य नगर निवासी 33 वर्षीय बबीता के पिता रामफूल सेना में थे। उनके निधन के बाद 2009 से ही बबीता ने खेती की जिम्मेदारी संभाल ली। बबीता ने बताया कि उनके पिता सेना में रहते हुए कुश्ती के नेशनल चैंपियन खिलाड़ी भी थे। पिता के निधन के बाद गृहस्थी और बुजुर्ग मां रामप्यारी की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई क्योंकि वह इकलौती संतान हैं।

बबीता ने न केवल मां को संभाला बल्कि खुद को मजबूत बनाने के लिए राजनीतिक शास्त्र में एमए और लोहारू के नेशनल कॉलेज से बीएड की पढ़ाई भी पूरी की। इसके बाद उन्होंने अपनी पुश्तैनी 13 एकड़ जमीन पर खेतीबाड़ी को ही अपना कार्यक्षेत्र बना लिया। बबीता का कहना है कि आज के समय में लड़कियों के लिए खेती-किसानी करना कठिन और मेहनत भरा काम माना जाता है लेकिन वह बचपन से ही पिता के साथ खेती करती आ रही हैं इसलिए यह काम उनके लिए सहज हो गया है। उन्होंने बताया कि 33 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने शादी नहीं की क्योंकि मां की देखभाल और खेतीबाड़ी में ही उनका पूरा समय व्यतीत होता है।


ट्रैक्टर ट्रॉली में 120 क्विंटल सरसों लेकर मंडी आई
ढिगावा मंडी में 120 क्विंटल सरसों ट्रैक्टर ट्रॉली में लेकर पहुंची बबीता ने बताया कि ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकरण के बाद केवल 99 क्विंटल सरसों ही सरकारी खरीद में बेची जाएगी जबकि शेष सरसों को प्राइवेट बोली पर बेचना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि वह हर साल फसल उगाने, कटाई करने और मंडी में बेचने तक का पूरा काम स्वयं संभालती हैं। उनकी मां रामप्यारी अब काफी बुजुर्ग हो चुकी हैं और खेत में ही उनका मकान बना हुआ है।