जींद-सोनीपत: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का हाई-स्पीड ट्रायल, जानें खासियत

जींद-सोनीपत रूट पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का हाई-स्पीड ट्रायल 26 जून को होगा। 120 किमी/घंटा की रफ्तार से जांचे जाएंगे सुरक्षा मानक।
 
हाइड्रोजन ट्रेन की विशेषताएं

जींद: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की हाई स्पीड ट्रायल रन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. ट्रायल प्रक्रिया की निगरानी के लिए अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की टीम आज यानी बुधवार को लखनऊ से जींद जंक्शन पहुंच जाएगी. इसके बाद ट्रेन का 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से परीक्षण किया जाएगा. हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल सोनीपत रूट पर निर्धारित किया गया है.

हाइड्रोजन ट्रेन का हाई स्पीड ट्रायल: हालांकि इसका ट्रायल 24 जून को लिया जाना था, लेकिन अब 26 जून को लिया जाएगा. पहले ट्रेन के कम गति वाले परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं. अब हाई स्पीड ट्रायल के जरिए ट्रेन के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की जाएगी. इसमें ब्रेकिंग सिस्टम, इंजन की क्षमता, सुरक्षा मानकों, कंपन, ट्रैक पर स्थिरता और विभिन्न परिस्थितियों में ट्रेन के प्रदर्शन का आंकलन किया जाएगा. आरडीएसओ की विशेषज्ञ टीम ट्रायल के दौरान प्राप्त होने वाले सभी तकनीकी आंकड़ों का विश्लेषण करेगी.

इन चीजों की होगी जांच: गौरतलब है कि रेलवे टीम द्वारा लगातार हाइड्रोजन ट्रेन की टेस्टिंग की जा रही है. टीम पावर कार, उससे जुड़े सुरक्षा, नियंत्रण उपकरण, स्पीड सेंसर, कंट्रोल सिस्टम को अलग-अलग गति पर परखा जा रहा है ताकि जब ट्रेन ट्रैक पर उतरे तो ट्रेन निर्धारित मानकों के अनुसार सुरक्षित रूप से संचालित हो सके. इस समय जींद-सोनीपत रूट पर तीन ट्रेन चल रही हैं. हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रैक पर उतरने पर यात्रियों को फायदा होगा. ट्रेन 360 किलोग्राम हाइड्रोजन में 180 किलोमीटर का सफर करेगी. ट्रेन में आवाज नहीं होगी, इसलिए इनमें यात्री आरामदायक सफर कर सकेंगे.

जींद-सोनीपत रूट पर दौड़ेगी ट्रेन: जींद से सोनीपत की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है. ये ट्रेन 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी. हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन आठ-दस डिब्बों की होगी. ये हाइब्रिड ट्रेन होंगी. जिनमें अक्षय ऊर्जा भंडारण जैसे बैटरी या सुपर कैपेसिटर लगे होंगे. ईंजन में डीजल की जगह फ्यूल सेल, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन डाली जाएगी. ऑक्सीजन की मदद से हाइड्रोजन नियंत्रित ढंग से जलेगी और इस ताप से बिजली पैदा होगी. बिजली लिथियम आयन बैटरी को चार्ज करेगी. जिससे ट्रेन चलेगी. इस दौरान धुएं की जगह सिर्फ भाप और पानी निकलेगा.