भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: सोनीपत-दिल्ली रूट पर 120 की रफ्तार से ट्रायल

जींद-सोनीपत-दिल्ली रूट पर भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल स्पीड ट्रायल। 120 किमी/घंटा की रफ्तार पर इंजन, ब्रेकिंग और ट्रैक स्थिरता की जांच पूरी।

 
हाइड्रोजन ट्रेन की रफ्तार

जींद: शनिवार को भी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का स्पीड रन किया गया. पहले डीजल इंजन ट्रेन को जींद जंक्शन से सोनीपत रेलवे स्टेशन तक लेकर पहुंची इसके बाद सोनीपत से दिल्ली के बीच हाइड्रोजन ट्रेन का स्पीड रन हुआ. इस दौरान ट्रेन को 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ाया गया. शनिवार को सोनीपत से दिल्ली के बीच हाइड्रोजन ट्रेन के चार चक्कर लगवाए गए.

दूसरे दिन भी हाइड्रोजन ट्रेन का स्पीड ट्रायल: जींद से दिल्ली जाते समय ट्रेन की स्पीड 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रही. सोनीपत से दिल्ली सब्जी मंडी के बीच ट्रेन के तीन ट्रायल हुए. इस दौरान ट्रेन को 80, 100 और 120 की अलग-अलग स्पीड मानकों पर ट्रायल किया गया. इससे पहले शुक्रवार को ट्रेन पहले जींद से दिल्ली गई थी और फिर दिल्ली से सोनीपत के बीच ट्रायल किए गए थे.

शुक्रवार को हुआ था पहला ट्रायल: शुक्रवार को दिल्ली से सोनीपत रूट पर ट्रेन का ट्रायल 85 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से किया गया था. इसके बाद सोनीपत से दिल्ली जाते समय भी ट्रेन की स्पीड 85 किलोमीटर प्रति घंटा रही थी. इसके बाद दिल्ली-सोनीपत रूट पर अपडाउन का चक्कर 100 किलोमीटर प्रति घंटा से ट्रायल किया गया. वहीं दिल्ली से सोनीपत आते समय अंतिम चक्कर 120 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड रखी गई थी. शुक्रवार देर रात ट्रेन सोनीपत से जींद वापस जींद पहुंची थी.

80 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा रही रफ्तार: इससे पहले 75 और 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हाइड्रोजन ट्रेन का स्पीड ट्रायल हो चुका है. अब ट्रेन के हाई स्पीड टेस्ट के दौरान हर बारीकी पहलुओं पर नजर बनाई जा रही है. ट्रायल में ब्रेकिंग सिस्टम, इंजन की क्षमता, कंपन सिस्टम, ट्रैक पर स्थिरता जैसे परिस्थितियों का आंकलन किया जा रहा है ताकि आगामी दिनों में जब ट्रेन ट्रैक पर हो तो रूट पर किसी तरह की परेशानी नहीं आए.

हाइड्रोजन ईंधन पर्यावरण के अनुकूल: हाई स्पीड परीक्षण के लिए बाहर से हाइड्रोजन गैस मंगवाई गई है ताकि ट्रेन को पर्याप्त ईंधन मिल सके. रेलवे अधिकारियों के अनुसार ये परीक्षण हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण है. इसके सफल रहने पर देश में स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा. इस परीक्षण की सफलता से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन का मार्ग और अधिक स्पष्ट हो जाएगा. हाइड्रोजन ईंधन पर आधारित ये ट्रेन पारंपरिक डीजल ट्रेनों की तुलना में पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भारतीय रेलवे को हरित व आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में नई पहचान मिलेगी.