जींद: सब्जी बेचने वाले की बेटी आरजू ने पास किया NEET, AIR 6227 हासिल की

जींद की आरजू ने आर्थिक तंगी को मात देकर NEET परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 6227 हासिल की। दादा की बीमारी से प्रेरित होकर डॉक्टर बनने का संकल्प किया पूरा।

 
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जींद: कहते हैं कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक अभाव भी हार मान लेते हैं. इस बात को जींद की रहने वाली आरजू ने सच साबित कर दिया है. दरअसल, सब्जी बेचने वाले परिवार की बेटी आरजू ने NEET में ऑल इंडिया 6227वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है.

दर्द से जन्मा डॉक्टर बनने का सपना: आरजू ने अपनी सफलता को लेकर बताया कि, "जब मैं छठी क्लास में थी, तब मेरे दादा गले की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. बेहतर इलाज नहीं मिलने के कारण उन्होंने परिवार की आंखों के सामने दम तोड़ दिया. दादा को इलाज के अभाव में खोना मेरे जीवन का सबसे बड़ा दुख था. उसी दिन मैंने तय कर लिया था कि डॉक्टर बनूंगी, ताकि किसी गरीब परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े. यही संकल्प मेरी सफलता की सबसे बड़ी ताकत बनी."

6 से 8 घंटे पढ़ाई, हर खुशी से बनाई दूरी: आरजू ने बताया कि, "अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए रोजाना छह से आठ घंटे नियमित पढ़ाई की. मनोरंजन और सामाजिक कार्यक्रमों से दूरी बना ली. यहां तक कि दोस्तों की जन्मदिन पार्टियों में भी जाना छोड़ दिया. मेरे सामने सिर्फ एक ही लक्ष्य था...डॉक्टर बनना. इसलिए हर दिन पूरी ईमानदारी से पढ़ाई की और खुद पर भरोसा बनाए रखा."

पिता ने सब्जी बेचकर पूरे किए सपने:आरजू के पिता सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. उन्होंने कहा कि, "बेटी ने डॉक्टर बनने का सपना देखा तो हमने अपनी हैसियत से बढ़कर उसका साथ दिया. सब्जी बेचकर जो कमाई होती थी, उसमें से पहले उसकी पढ़ाई का खर्च निकालते थे. आज उसकी सफलता ने सारी मेहनत सफल कर दी."

मां का भरोसा और परिवार का त्याग बना ताकत: वहीं, आरजू की मां ने बताया कि, "परिवार ने हमेशा बेटी को पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल दिया. हमें विश्वास था कि हमारी बेटी मेहनत जरूर रंग लाएगी. आज उसकी सफलता हर माता-पिता के लिए प्रेरणा है कि बेटियों के सपनों पर भरोसा करना चाहिए."

हजारों युवाओं के लिए बनी प्रेरणा: आरजू की उपलब्धि उन विद्यार्थियों के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. उसने साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां सफलता की राह नहीं रोक सकतीं, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो. अब उसका सपना एक संवेदनशील डॉक्टर बनकर जरूरतमंद लोगों की सेवा करना है.