Julana Shadipur News 2026: रिटायर्ड होने से महज 2 महीने पहले सेना के नायब सूबेदार नरेश लाठर का निधन, पूरे क्षेत्र में शोक

जुलाना के शादीपुर गांव निवासी भारतीय सेना के नायब सूबेदार नरेश लाठर (42) का लेह-लद्दाख में हार्ट अटैक से निधन। सेवानिवृत्ति से 2 माह पूर्व घटी दुखद घटना।
 
Julana Naresh Lather Army Death News

जुलाना : जींद जिले के जुलाना उपमंडल अंतर्गत आने वाले गांव शादीपुर निवासी और भारतीय सेना में कार्यरत 42 वर्षीय नायब सूबेदार नरेश लाठर का लेह-लद्दाख में ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से दुखद निधन हो गया। देश की सीमा पर 22 वर्षों तक निष्ठापूर्वक सेवाएं देने वाले इस जांबाज सैनिक के असमय निधन की खबर मिलते ही शादीपुर गांव समेत समूचे जुलाना क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। इस वज्रपात से जहां परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, वहीं दो मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है।

🎖️ 22 वर्षों का गौरवशाली सैन्य सफर; सेवानिवृत्त होकर घर लौटने का इंतजार कर रहा था परिवार

सैनिक का सेवाकाल व पृष्ठभूमि:

  • सेवा का कार्यकाल: नायब सूबेदार नरेश लाठर पिछले 22 वर्षों से भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे थे। वर्तमान में उनकी तैनाती लेह-लद्दाख की दुर्गम और सीमावर्ती परिस्थितियों में थी।

  • पारिवारिक उम्मीदें: उन्होंने अपने सैन्य कार्यकाल के दौरान हमेशा मातृभूमि की रक्षा के दायित्व को सर्वोपरि रखा। परिजनों को उम्मीद थी कि वे जल्द ही सेवानिवृत्त होकर घर लौटेंगे और परिवार के साथ सुखद समय व्यतीत करेंगे, लेकिन इस अनहोनी ने परिवार की तमाम खुशियों को मातम में बदल दिया।

👨‍👩‍👧‍👦 पीछे छोड़ गए पत्नी व दो मासूम बच्चे; 9वीं और 11वीं कक्षा में पढ़ते हैं बच्चे

परिवार का हाल:

  • अधूरा रहा सहारा: नरेश लाठर अपने पीछे 39 वर्षीया पत्नी प्रीति (गृहिणी), 15 वर्षीया बेटी चाहत (11वीं कक्षा की छात्रा) और 13 वर्षीय बेटा अरमान (9वीं कक्षा का छात्र) को छोड़ गए हैं।

  • असमय खालीपन: जिस उम्र में बच्चों को पिता के सही मार्गदर्शन, दुलार और आर्थिक-सामाजिक सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी मोड़ पर कुदरत ने उन्हें यह गहरा और असह्य दर्द दिया है।

☎️ दो महीने बाद होनी थी सेवानिवृत्ति; कमांडर की कॉल आते ही परिजनों के पैरों तले खिसकी जमीन

चाचा धर्मबीर लाठर ने बताई पूरी बात:

  • रिटायरमेंट का फैसला: मृतक जवान के चाचा धर्मबीर लाठर ने बताया कि नरेश को मात्र दो महीने बाद सेना से सेवानिवृत्त होना था। हालांकि, परिवार ने उन्हें समझाया था कि दो साल बाद उन्हें सूबेदार पद पर पदोन्नति मिल जाएगी, लेकिन उन्होंने पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार ही सेवानिवृत्ति लेने का मन बनाया था।

  • फोन से मिली सूचना: बुधवार दोपहर बाद सेना के कमांडर का फोन परिवार के पास आया, जिन्होंने बताया कि ड्यूटी के दौरान दिल का दौरा पड़ने से नरेश लाठर का निधन हो गया है। 22 साल तक देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद घर वापसी से ठीक दो महीने पहले उनका इस दुनिया से चले जाना पूरे क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।