Kaithal Jail Raksha Bandhan 2026: कैथल जिला जेल में राखी बांधते वक्त छलक पड़े आंसू, बहनों ने भाइयों को बांधी राखी
कैथल : भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन कैथल जिला जेल में इस बार भावनाओं से सराबोर नजर आया। जेल की चारदीवारी के बीच जब बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी तो कई परिवारों की आंखें नम हो गईं। राखी बांधने के बाद बहनें भावुक होकर अपने भाइयों के गले मिलीं और दोनों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
जेल सुपरिंटेंडेंट अशोक कुमार ने बताया कि कैथल जेल में वर्तमान में 717 बंदी हैं, जिनमें 28 महिला बंदी एवं कैदी शामिल हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर सभी बंदियों की उनके परिजनों से सुबह 7 बजे से खुली मुलाकात करवाई जा रही है। जेल महानिदेशक के आदेशानुसार त्योहार को जेल में विशेष उत्साह और धूमधाम से मनाया जा रहा है।
किसी ने बच्चों को गले लगाया, किसी ने बहन में मां को देखा
मुलाकात के दौरान कई ऐसे भावुक दृश्य सामने आए, जिन्हें देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। एक बंदी अपने बच्चों को देखकर उन्हें प्यार करता और गले लगाता नजर आया। वहीं कुछ बंदी अपनी बहनों से मिलकर फूट-फूटकर रो पड़े।
किसी बंदी ने अपनी बहन को गले लगाकर आंसू बहाए तो किसी के लिए बहन का प्यार मां की याद लेकर आया। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनकी सलामती की दुआ की। कई भाई भी बहनों को देखकर भावुक हो गए। रक्षाबंधन पर जेल में बंद महिला बंदियों के लिए भी विशेष मुलाकात की व्यवस्था की गई। महिला बंदियों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और रक्षाबंधन का पर्व मनाया।
महिला बंदी ने पुलिसकर्मी को बांधी राखी
जेल में रक्षाबंधन के दौरान एक अलग और भावुक तस्वीर भी सामने आई। एक महिला बंदी ने जेल में तैनात पुलिसकर्मी को राखी बांधी। इस दौरान भाई-बहन के रिश्ते की भावना और अपनापन देखने को मिला। पुलिसकर्मी ने भी महिला बंदी की भावनाओं का सम्मान किया।
रक्षाबंधन ने दिया बड़ा संदेश: गलत काम अपनों से दूर कर देते हैं
कैथल जेल में मनाया गया रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं रहा, बल्कि अपने आप में एक बड़ी सीख भी दे गया। जिंदगी में किए गए गलत काम कई बार इंसान को उन्हीं लोगों से दूर कर देते हैं, जिनका साथ उसके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है।
अपनों से मिलना, परिवार के साथ रहना और उनके सुख-दुख में शामिल होना कितना जरूरी है, इसकी असली अहमियत जेल में मनाए गए रक्षाबंधन के दौरान सामने आई। जब बहनें भाइयों को राखी बांधकर उनके गले मिलीं तो कई आंखें नम थीं। किसी बंदी ने अपने बच्चों को सीने से लगाया तो किसी ने बहन के गले लगकर आंसू बहाए।
रक्षाबंधन का यह पर्व बंदियों को यह सोचने का मौका भी देता नजर आया कि गलत रास्ते इंसान को अपनों से दूर कर देते हैं, जबकि परिवार का साथ जिंदगी की सबसे बड़ी ताकत है। जेल की चारदीवारी के बीच भाई-बहन के इन भावुक पलों ने परिवार और अपनों की अहमियत का यह संदेश और भी गहराई से सामने रखा।