हरियाणा कांग्रेस गुटबाजी: कुमारी सैलजा का बड़ा बयान, गिनाईं ये वजहें

हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी पर सांसद कुमारी सैलजा ने उठाए गंभीर सवाल। कहा- पावर पॉलिटिक्स के कारण पार्टी सत्ता से दूर, कार्यकर्ताओं को मिले सम्मान।

 
हरियाणा कांग्रेस प्रभारी

चंडीगढ़: हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से चर्चा का विषय रही गुटबाजी पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद कुमारी सैलजा ने खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि "पार्टी का सत्ता से बाहर रहना सबसे बड़ा सवाल है और इसकी एक बड़ी वजह नेताओं के बीच की खींचतान तथा पावर पॉलिटिक्स है. जब गुटबाजी जमीन तक पहुंच जाती है, तो कार्यकर्ता भी एक-दूसरे को नमस्ते तक नहीं कर पाते, जिसका सीधा नुकसान पार्टी को उठाना पड़ता है."

कांग्रेस की गुटबाजी पर खुलकर बोली कुमारी सैलजा: सैलजा ने कहा कि "हर कार्यकर्ता चाहता है कि कांग्रेस सत्ता में आए, इसलिए सबसे पहले इस मूल सवाल को समझना होगा कि पार्टी सरकार क्यों नहीं बना पाई. मंच पर बैठे सभी नेता कार्यकर्ताओं की बदौलत यहां तक पहुंचे हैं, लेकिन असली दिक्कत तब शुरू होती है जब संगठन जमीन पर अलग-अलग गुटों में बंट जाता है."

'एक कार्यकर्ता दूसरे को नमस्ते नहीं कर पाता'- सैलजा: कुमारी सैलजा ने कहा "एक कार्यकर्ता दूसरे को नमस्ते नहीं कर पाता, एक नेता दूसरे नेता को नमस्ते नहीं कर पाता. इतने ज्यादा गुट जोड़ दिए जाते हैं, मैं तो कहूंगी तोड़ दिए जाते हैं. मीडिया अक्सर गुटबाजी को लेकर सवाल पूछता है और ये राजनीति का हिस्सा भी है, लेकिन जब गुट संगठन पर हावी हो जाते हैं तो उसका सबसे बड़ा नुकसान चुनाव में दिखाई देता है. पार्टी के सत्ता में नहीं आने की एक वजह नेताओं की पावर पॉलिटिक्स भी है."

'केवल संसद में आवाज उठाने से काम नहीं चलेगा': कांग्रेस सांसद ने कहा कि "कांग्रेस कोई सामाजिक संगठन नहीं, बल्कि राजनीतिक दल है और उसका उद्देश्य सत्ता में आकर जनता के लिए काम करना है. बीजेपी की जनविरोधी नीतियों का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस का सत्ता में आना जरूरी है. संसद में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे सरकार को घेरते हैं, लेकिन केवल संसद में आवाज उठाने से काम नहीं चलेगा. जब तक पार्टी का संदेश गांव और बूथ स्तर तक नहीं पहुंचेगा, तब तक कांग्रेस मजबूत नहीं होगी. पार्टी इस मोर्चे पर अभी सफल नहीं हो पाई है."

कांग्रेस हरियाणा प्रभारी को दी नसीहत: कुमारी सैलजा ने नए प्रभारी से भी उम्मीद जताई कि संगठन में हर कार्यकर्ता को सम्मान मिले और उसके योगदान की पहचान हो. उन्होंने कहा कि "ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी को सीधे जीरो से उठाकर इक्कीस पर पहुंचा दिया जाए. ऐसा होगा तो सवाल उठेंगे और कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ेगी. हर बार नए प्रभारी के आने पर साथ मिलकर काम करने की बातें होती हैं, लेकिन जब तक कथनी को करनी में नहीं बदला जाएगा, तब तक संगठन में वास्तविक बदलाव संभव नहीं है."