Ratnavali Festival Rasiya Dance Details: 'मेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया' पर थिरके युवा, लट्ठमार होली के दृश्य ने जीता दर्शकों का दिल

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में रत्नावली महोत्सव 2026 का आयोजन। 33 विधाओं में युवाओं ने बिखेरे हरियाणवी संस्कृति के रंग। रसिया नृत्य और मीडिया चौपाल बने आकर्षण का केंद्र।
 
Rasiya Dance Kurukshetra News

हरियाणा की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (KUK) में आयोजित 4 दिवसीय राज्य स्तरीय 'रत्नावली महोत्सव 2026' में इन दिनों प्रदेश की लोक संस्कृति, समृद्ध विरासत और मातृभाषा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। 1 से 4 नवंबर तक चलने वाले इस राज्य स्तरीय महोत्सव में हरियाणा के कोने-कोने से पहुंचे हजारों युवा कलाकार अपनी कला के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों को जीवंत कर रहे हैं। इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आज के आधुनिक दौर में भी नई पीढ़ी अपनी हरियाणवी बोली, पारंपरिक पहनावे और लोक कलाओं को लेकर बेहद गौरवान्वित और उत्साहित नजर आ रही है।

🎨 33 अलग-अलग विधाओं में प्रस्तुतियां; हरियाणवी मीडिया चौपाल पर विचारों का आदान-प्रदान

महोत्सव के प्रमुख आकर्षण:

  • विविध सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं: महोत्सव के दौरान कुल 33 अलग-अलग सांस्कृतिक विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इसमें लोकगीत, लोकनृत्य, नाटकों और संगीत के जरिए हरियाणा की असली पहचान को मंच पर उकेरा जा रहा है।

  • हरियाणवी मीडिया चौपाल बनी आकर्षण का केंद्र: हिंदी विभाग द्वारा संचालित 'हरियाणवी मीडिया चौपाल' पर सुबह से शाम तक विद्यार्थियों, पर्यटकों और आम लोगों का तांता लगा हुआ है। इस खुले मंच पर युवा खुलकर अपनी मातृभाषा हरियाणवी में अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं।

  • विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया: हिंदी विभाग की छात्रा रचना ने बताया कि रत्नावली अपनी जड़ों से जुड़ने का एक बेहतरीन जरिया है। वहीं छात्रा मनीषा के अनुसार, यह मंच युवाओं को अपनी कलात्मक प्रतिभा के बल पर विशिष्ट पहचान बनाने का बड़ा अवसर प्रदान करता है।

🪕 'रसिया नृत्य' में जीवंत हुआ ग्रामीण जीवन; टोकणी, छाज, ढोलक और घुंघरू की ताल पर थिरके कलाकार

रसिया नृत्य प्रतियोगिता की मनमोहक झलकियां:

  • पारंपरिक वेशभूषा: महोत्सव के तीसरे दिन ग्रुप डांस 'रसिया' प्रतियोगिता में आरकेएसडी पीजी कॉलेज कैथल और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय सहित कई टीमों ने भाग लिया। पुरुष कलाकार धोती-कुर्ता, पगड़ी और कमरबंद में नजर आए, तो वहीं महिला कलाकारों ने पारंपरिक 'दामण-कुर्ती' और देशी आभूषणों से मंच पर चमक बिखेरी।

  • लोक वाद्य यंत्र व सामग्री: नृत्य के दौरान ढोलक, हारमोनियम और घुंघरू के साथ-साथ ग्रामीण जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं जैसे 'टोकणी' और 'छाज' का बखूबी प्रदर्शन किया गया।

🪵 'मेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया' पर लट्ठमार होली का अद्भुत अभिनय; बिना शारीरिक स्पर्श के प्रस्तुत की पारंपरिक शैली

रसिया नृत्य का मुख्य प्रसंग:

  • लट्ठमार होली का मंचन: प्रतियोगिता के दौरान 'मेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होली में' लोकगीत पर कलाकारों की प्रस्तुति ने दीर्घा में बैठे सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

  • कलात्मक बचाव व अभिनय: महिला कलाकारों ने लट्ठ बरसाने का सजीव अभिनय किया, वहीं पुरुष कलाकारों ने ढाल (Shield) के जरिए अपना बचाव दर्शाया। इस नृत्य शैली की खासियत यह रही कि कलाकारों ने बिना किसी शारीरिक स्पर्श के लट्ठमार होली की पूरी पारंपरिक मर्यादा का पालन करते हुए इसे खूबसूरती से प्रस्तुत किया।

🌟 युवाओं के लिए प्रेरणादायी मंच; हरियाणवी बोली और लोक परंपरा ही प्रदेश की असली पहचान

सांस्कृतिक संदेश और महत्व:

  • विरासत का हस्तांतरण: रत्नावली महोत्सव केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि हरियाणवी भाषा और परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक स्थानांतरित करने का एक जीवंत सेतु साबित हो रहा है।

  • नई पहचान और गौरव: युवा पीढ़ी यह साबित कर रही है कि हरियाणवी बोली और लोक परंपराएं केवल अतीत की बातें नहीं हैं, बल्कि आधुनिक दौर में भी ये प्रदेश की असली पहचान, शान और गौरव का प्रतीक हैं।