पंचकूला NIA: मात्र 10 रुपये में इलाज, जानें आयुर्वेद संस्थान की खूबियां

पंचकूला के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में मात्र 10 रुपये में ओपीडी कार्ड और मुफ्त इलाज। 250 बेड, अत्याधुनिक सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उपलब्ध। पूरी जानकारी।

 
सरकारी आयुर्वेद संस्थान हरियाणा

पंचकूला: राजस्थान के जयपुर स्थित देश के पहले राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), मानद विश्वविद्यालय का पहला ऑफ कैंपस एवं सैटेलाइट इंस्टीट्यूट पंचकूला स्थित मनसा देवी परिसर में संचालित है. इस संस्थान में रोजाना अनेक रोगों से ग्रस्त मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं. आयुर्वेद पद्धति से यहां मरीजों का इलाज होता है. ये राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का बड़ा मददगार साबित हो रहा है.

निशुल्क किए जाते हैं कई मेडिकल टेस्ट: संस्थान में महज दस रुपये का मेडिकल कार्ड बनवाने के बाद संपूर्ण इलाज निशुल्क प्रदान किया जा रहा है. राष्ट्रीय लैबोरेट्री से कई मेडिकल टेस्ट भी निशुल्क किए जाते हैं. कुछ ही मेडिकल टेस्ट ऐसे हैं, जिनके लिए न्यूनतम शुल्क देना पड़ता है. नतीजतन एनआईए संस्थान में वर्ष 2026 के महज छह माह में ओपीडी का आंकड़ा करीब 50 हजार पर पहुंच गया है.

12 विभागों के विशेषज्ञ और 250 आईपीडी सुविधा: राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने बताया कि "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 12 फरवरी 2019 को संस्थान का नींव पत्थर रखा गया था. फिर 16 अक्टूबर 2023 को संस्थान में ओपीडी स्तर की सेवाएं शुरू की गई. इसके बाद 9 अप्रैल 2024 से अब तक 12 विशेषज्ञों की ओपीडी जारी है. अस्पताल में रोजाना साढ़े तीन सौ से पांच सौ मरीज आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज कराने पहुंच रहे हैं. पंचकर्मा विधि से अर्धरंग समेत कई अन्य रोगों से ग्रस्त रोगियों का इलाज किया जाता है."

विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी: कायचिकित्सा, पंचकर्म, शल्य और शालाक्य तंत्र विभाग में मरीजों की अधिक भीड़ रहती है. अगद तंत्र-विष चिकित्सा के साथ प्रसूति एवं स्त्री रोग और त्वक एवं सौंदर्य विभाग की ओपीडी सेवाओं का भी रोगी बड़ी संख्या में लाभ उठा रहे हैं. इनके साथ-साथ आपातकालीन सेवाएं भी शामिल हैं. वहीं, संस्थान में 250 बिस्तरों की अत्याधुनिक आईपीडी (इनडोर पेशेंट विभाग) संचालित है, जहां गंभीर एवं दीर्घकालिक रोगों से पीड़ित मरीजों को भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार किया जा रहा है.

मनमानी डाइट एवं खराब लाइफस्टाइल: प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने कहा कि "मनमानी डाइट और खराब लाइफस्टाइल के चलते लोग अनेक रोगों से ग्रस्त हो रहे हैं. इंडस्ट्रालाजेशन होने समेत पॉल्यूशन व अन्य कारकों से डायबटीज, हाइपरटेंशन, ओबेसिटी समेत कई रोग ऐसे हैं, जो खराब लाइफस्टाइल से संबंधित बीमारियां हैं. सभी रोगों से निजात पाने के लिए आयुर्वेद सबसे बेहतर पद्धति है. प्राकृतिक चिकित्सा, जड़ी-बूटियों के माध्यम से इलाज किया जाता है. विभिन्न प्रकार के रोगों के लिए विभिन्न औषधियों का इस्तेमाल किया जाता है. संस्थान में आयुर्वेद पद्धति से अनेक रोगों का इलाज सस्ती दरों पर किया जा सकता है."

अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्स-रे और पंचकर्मा: प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने बताया कि "भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा संस्थान में अनेक सुविधाएं शुरू की गई हैं. जबकि आगामी समय में कई और सुविधाएं शुरू की जानी हैं. संस्थान के वाइस चांसलर, संजीव शर्मा सदैव बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने और किन्हीं भी प्रकार की कमियों को दूर करने को निरंतर प्रयासरत हैं. संस्थान में सेंट्रल लैबोरेट्री, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्स-रे, ईसीजी, विशेष पंचकर्मा यूनिट स्थापित हैं. योगा और फिजियोथैरिपी समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं. अनेक मेडिकल टेस्ट संस्थान की लैब में कराए जाते हैं, जबकि कुछ टेस्ट एमओयू के तहत अच्छी लैब से करवाए जाते हैं. इन सभी मेडिकल टेस्ट के लिए न्यूनतम फीस ली जाती है."

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बन रहा संस्थान: संस्थान के डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने कहा कि "भारत सरकार की मंशा के अनुसार पंचकूला स्थित इस राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (आयुर्वेदिक शिक्षा, मरीज देखभाल या अनुसंधान) के लिए विकसित किया जा रहा है. क्योंकि इस संस्थान से हरियाणा, चंडीगढ़ (ट्राईसिटी), पंजाब समेत हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लोगों तक को फायदा मिल रहा है. करीब 20 एकड़ में फैले इस राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में ओपीडी की तर्ज पर आईपीडी की सुविधा भी दी जा रही हैं. रोगियों को दाखिल कर उनका इलाज किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि करीब 50-80 मरीज आईपीडी स्तर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं."

पंचकर्मा टेक्निशियन का वार्षिक सर्टिफिकेट कोर्स: प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने बताया कि "संस्थान में पंचकर्मा संबंधी कुछ सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए गए हैं. बीते वर्ष से पंचकर्मा टेक्निशियन की तीस सीटों के लिए वार्षिक सर्टिफिकेट कोर्स कराया जा रहा है. आगामी समय में संस्थान को भी टेक्निशियन की सेवाओं की आवश्यकता पड़ सकती है. इसके अलावा युवाओं को अन्य सरकारी और निजी आयुर्वेद के पंचकर्मा के तहत रोजगार मिल सकेगा."

ऑपरेशन थियेटर तैयार हुए: प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने बताया कि "राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में आत्याधुनिक ऑपरेशन थियेटर लगभग तैयार कर लिए गए हैं. नतीजतन जल्द ही सर्जरी की सेवा भी शुरू की जा सकती हैं. सभी सुविधाओं से लैस ऑपरेशन थियेटर बनकर तैयार हो गए हैं. संस्थान में शल्य चिकित्सक बवासीर, भगंदर, फिशर या फिस्टूला के रोग का इलाज किया जाता है. आयुर्वेद की विधि से प्राकृतिक तरीकों से रोगियों का इलाज किया जाता है, ताकि मरीज लंबे समय तक चलने वाली दवाओं समेत अन्य प्रकार की शारीरिक चुनौतियों से अपना बचाव कर सकें."

तीन साल का ओपीडी ग्राफ:

वर्ष कुल ओपीडी
2024 42,030
2025 80,878
2026 50,000 (जनवरी से जून तक)

वर्ष 2026 में ओपीडी का आंकड़ा:

महीना ओपीडी
जनवरी 7004
फरवरी 7623
मार्च 7527
अप्रैल 7973
मई 8911
जून 9548

वर्ष 2026 में जनवरी से जून तक महत्वपूर्ण विभागों का ओपीडी डाटा

विभाग ओपीडी
पंचकर्म विभाग 11,591
कायचिकित्सा 10,319
शल्य विभाग 9415
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग 3228
शालाक्य तंत्र 5390
अगद तंत्र 2838
त्वक एवं सौंदर्य विभाग 2572

संस्थान में कुल स्टाफ और अन्य सुविधाएं: राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला में कुल स्टाफ की संख्या 150 है, इनमें टीचिंग स्टाफ की संख्या 23 है. वहीं, करीब महीने भर बाद 34 नई फैकल्टी शामिल हो सकती है, जिनमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल रहेंगे. संस्थान में 200 सीटों वाली एक लाइब्रेरी भी संचालित है, जबकि 670 सीटों वाला एक ऑडिटोरियम है. संस्थान में दिव्यांग, वरिष्ठ जनों और स्टाफ सदस्यों (स्थाई या अस्थाई), दोनों और छात्रों के लिए इलाज और मेडिकल टेस्ट की सुविधा निशुल्क हैं. यूजी व पीजी के (बॉयज व गर्ल्स) छात्रों के लिए 2-2 हॉस्टल और एक इंटरनेशनल हॉस्टल की सुविधा है, जिनमें करीब 300-350 छात्रों के रहने का प्रबंध हैं. संस्थान में पीजी के पांच विभाग संचालित हैं, इस अनुसार करीब 70 सीट उपलब्ध बताई गई हैं.