Girl Child Empowerment Updates: दीपावली पर 'एक दिया बेटी के नाम' जलाएं, महिला आयोग हर बेटी के साथ खड़ा: ऊषा प्रियदर्शनी

पंचकूला में जानलेवा हमले से उबरी 6 वर्षीय बच्ची स्वस्थ होकर घर लौटी। हरियाणा महिला आयोग अध्यक्ष ने 12वीं तक बच्चों को मोबाइल न देने की सलाह दी।
 
Kids Mobile Ban Recommendation 2026

हरियाणा के पंचकूला स्थित सरकारी स्कूल में हुए दर्दनाक हादसे के बाद जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही 6 वर्षीय मासूम बच्ची आखिरकार पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट आई है। जब बच्ची घर पहुँची, तो स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर उसका जोरदार स्वागत किया। अपनी लाडली को वापस अपने बीच देखकर परिजनों की आंखें खुशी से छलक पड़ीं और पिता ने कहा कि बेटी के सही-सलामत लौटने की खुशी को वे शब्दों में बयां नहीं कर सकते। इस अवसर पर बच्ची की मां ने सभी अभिभावकों और स्कूल प्रबंधकों से अपने बच्चों की सुरक्षा व गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने की अपील की, ताकि किसी अन्य मासूम को ऐसे दौर से न गुजरना पड़े।

🧠 हरियाणा राज्य महिला आयोग की सख्त प्रतिक्रिया: "घटना के कारणों को समझना और बच्चे के दिमाग को पढ़ना जरूरी"

घटना के मनोवैज्ञानिक कारणों पर आयोग का रुख:

  • गंभीर चिंता: हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ऊषा प्रियदर्शनी ने 8 वर्षीय बच्चे द्वारा 6 साल की बच्ची पर किए गए इस हिंसक हमले को बेहद चिंताजनक और संवेदनशील बताया।

  • पालन-पोषण व पारिवारिक माहौल: उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में बच्चे के मन में इतनी निर्दयता और हिंसक भावनाएं किन कारणों से आईं, यह समझना बेहद जरूरी है। अक्सर घरों में माता-पिता के आपसी झगड़े और नकारात्मक माहौल का असर सीधे बच्चों की मानसिकता पर पड़ता है, जिससे वे बाहर अपना आपा खो बैठते हैं।

📱 12वीं कक्षा तक के बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर लगे रोक: महिला आयोग अध्यक्ष की बड़ी सलाह

डिजिटल मीडिया और हिंसक गेम्स के खतरे:

  • मोबाइल बैन की पैरवी: ऊषा प्रियदर्शनी ने अपने व्यक्तिगत सुझाव में कहा कि 12वीं कक्षा तक के बच्चों को निजी मोबाइल फोन देने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे सोशल मीडिया के दुरुपयोग की संभावना बनी रहती है।

  • ऑनलाइन गेम्स का नकारात्मक असर: उन्होंने विदेशी हिंसक ऑनलाइन गेम्स की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि बच्चे ऐसे गेम्स देखकर बहुत ज्यादा एग्रेसिव (आक्रामक) और चिड़चिड़े हो जाते हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवहार के लिए बेहद घातक है।

🪔 "इस दीपावली एक दिया बेटी के नाम जलाएं"; हर पीड़ित महिला के साथ खड़ा है आयोग

प्रदेश की महिलाओं को संदेश:

  • सुरक्षा व सम्मान की गारंटी: आयोग की अध्यक्ष ने प्रदेश की सभी महिलाओं व बेटियों को दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए विश्वास दिलाया कि किसी भी प्रकार के अत्याचार या अन्याय पर हरियाणा सरकार और महिला आयोग त्वरित कार्रवाई के लिए हमेशा तत्पर हैं।

  • विशेष अपील: उन्होंने आमजन से अपील की कि इस बार की दीपावली पर हर परिवार अपने घर में 'एक दिया बेटी के नाम' अवश्य प्रज्वलित करे।

🚨 साइकोलॉजिस्ट की चेतावनी: "बच्चों के बदलते व्यवहार पर सजग रहें समाज, परिवार और स्कूल"

विशेषज्ञ राय और सुझाव:

  • अलार्मिंग कॉल: काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट विनीता जोशी ने इस घटना को समाज के लिए एक 'अलार्मिंग कॉल' (चेतावनी की घंटी) बताया।

  • व्यवहार पर सतत निगरानी: उन्होंने कहा कि आज के दौर में कम उम्र के बच्चों में भी गुस्सा और आक्रामकता तेजी से बढ़ रही है। इसलिए परिजनों, शिक्षकों और पूरे समाज को मिलकर यह देखना होगा कि बच्चे इंटरनेट व माहौल से क्या सीख रहे हैं। उनके व्यवहार में आ रहे बदलावों को समय रहते पहचानकर काउंसलिंग की जानी चाहिए।