Haryana Meri Fasal Mera Byavra Portal: पंजाब सीमा के पास स्थित पंचकूला मंडी पर पड़ी पाबंदियों की मार, खंडहर हो रहे हैं बूथ

पंचकूला सेक्टर-20 की अनाज मंडी किसानों के न आने और सरकारी पाबंदियों के चलते वीरान पड़ी है। आढ़तियों ने सरकार से इसके जीर्णोद्धार की मांग की है।

 
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जिला पंचकूला में यूं तो तीन अनाज मंडियां मौजूद हैं, लेकिन पंचकूला शहर के सेक्टर-20 की अनाज मंडी काम की कम और केवल नाम की ज्यादा रह गई है. शहर के आसपास खेती योग्य जमीन न होने और रायपुररानी-बरवाला जैसी ग्रामीण मंडियों के सक्रिय होने के कारण स्थानीय किसान वहीं अपनी फसल बेचते हैं. नतीजतन, पंचकूला शहर की यह अनाज मंडी सालभर वीरान नजर आती है, जिससे आढ़तियों में सरकार की अनदेखी के खिलाफ भारी निराशा है.

📉 वर्ष 1997-1998 में हुई थी पहली नीलामी, 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल के बाद कारोबार पर लगा पूर्ण विराम

मंडी के आढ़ती हरभजन सिंह ने जानकारी दी कि सेक्टर-20 मंडी में प्लॉटों की पहली नीलामी 1997-98 में हुई थी, लेकिन लंबे समय से उपेक्षा के चलते 73 में से केवल 35-56 प्लॉट ही बिक सके और काम करने वाले आढ़तियों की संख्या घटकर महज पांच रह गई है. इसके अलावा, हरियाणा सरकार द्वारा 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल शुरू किए जाने और पंजाब व अन्य पड़ोसी राज्यों के किसानों की फसल खरीद पर रोक लगने के कारण बॉर्डर के नजदीक होने के बावजूद इस मंडी का कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया है.

🏚️ 20 एकड़ में फैली पॉश इलाके की मंडी बदहाल: सेब मंडी के लिए बने बूथ भी बन रहे हैं खंडहर

यह अनाज मंडी करीब 20 एकड़ भूमि पर फैली है और पंचकूला-शिमला हाईवे के समीप बेहद पॉश क्षेत्र में स्थित है. इसके बावजूद यहां सन्नाटा पसरा रहता है. मंडी के अंदर बनाए गए दो मंजिला बूथ भी ग्राहकों और खरीदार न मिलने के कारण अब खंडहर में तब्दील हो रहे हैं. आढ़तियों ने मांग की है कि यदि किसानों की फसल यहां नहीं आ सकती, तो सरकार इस करोड़ों रुपये की कीमती जमीन पर किसी अन्य व्यावसायिक गतिविधि या वैकल्पिक कामकाज की अनुमति दे, ताकि कारोबारियों को राहत मिल सके.