Success Story of Jayanti Kumari Panchkula: जानिए कैसे एक महिला ने अपने हुनर से बदल दी दर्जनों परिवारों की आर्थिक स्थिति
पंचकूला: आत्मनिर्भर होकर हर व्यक्ति न केवल समाज की मुख्य धारा से जुड़कर स्वयं को सशक्त बनाता है, बल्कि देश के विकास में भी बड़ा योगदान देता है. ऐसी ही एक कहानी चंडीगढ़ की रहने वाली जयंती कुमारी की है, जिनके पति ऑटो ड्राइवर हैं लेकिन उन्होंने अपने कौशल से आत्मनिर्भर बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया. यहां तक कि गांव खुड्डा लोहरा में अपने मोहल्ले और अन्य जगहों की करीब 150 गृहणियों को भी काम सिखाया और आज यह सभी महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर घर से ही कमाई कर रही हैं.
ऊन से तैयार करती हैं आकर्षक सामान : जयंती कुमारी ने बताया कि वह अलग-अलग रंगों की ऊन से विभिन्न प्रकार का आकर्षक सामान तैयार करती हैं. ऊन के कपड़ों से लेकर टेडी बियर, हेयर क्लिप, हेयर बैंड, हैंड बैंड, फूल-गुलदस्ते, दस्ताने, टोपी, बच्चों के लिए टॉय समेत विभिन्न प्रकार का सजावटी सामान तैयार करती है. जयंती ने अपने इस कौशल को अपनी आजीविका का साधन बनाया और अब वह घर पर रहकर ही अपने तैयार किए सामान को बेचकर कमाई कर रही हैं. बताया कि वह चंडीगढ़ नगर निगम, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा लगाई जाने वाली प्रदर्शनी और निजी प्रदर्शनियों में भी अपना स्टॉल लगाती हैं, जहां लोग उनका बनाया सामान काफी पसंद करते हैं, जिनकी बिक्री से कमाई भी अच्छी हो जाती है.
150 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर: जयंती कुमारी ने अपने इस कौशल को खुद तक सीमित न रखते हुए अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से इसका इस्तेमाल किया. उन्होंने गांव खुड्डा लौहरा में अपने मोहल्ले और अन्य जगहों की करीब उन डेढ़ सौ गृहणियों को अपने साथ जोड़ा, जो विभिन्न कारणों से या तो घरों से बाहर नहीं निकाल पाती थी या आत्मनिर्भर होने के लिए कोई काम नहीं जानती थी. बीते करीब आठ वर्षों से जयंती ऐसी महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं. नतीजतन यह सभी महिलाएं आज आत्मनिर्भरता के साथ घरों पर रहते हुए भी कमाई कर रही हैं और अपने परिवारों की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं.
सहयोगी महिलाओं ने साझा की खुशी: जयंती की मदद से ऊन से बनने वाली चीजों का काम सीखकर आत्मनिर्भर बन कमाई कर रही महिला बीना ने कहा कि "वह क्रोशिया से अब कई तरह की चीजें बना लेती हैं. लगभग एक वर्ष से जयंती के साथ जुड़कर काम कर रही हैं. जबकि पहले उनमें यह कौशल नहीं था." दूसरी सहयोगी महिला सरिता ने कहा कि "उन्हें भी पहले ऊन से विभिन्न आइटम बनानी नहीं आती था लेकिन अब काफी कुछ सीख गई हैं."
अंजू ने कहा कि "अब वह क्रोशिया उन और धागे से कई चीज बना लेती है, जिनमें कई रंगीन और आकार के फूल भी हैं. इसके अलावा वह लुडो गिट्टी और कुछ अन्य आइटम भी बनाती हैं." इस कौशल को सिखाने के लिए उन्होंने जयंती कुमारी का धन्यवाद प्रकट किया.
चौथी सहयोगी महिला अंजू ने कहा कि "जयंती कुमारी ने उन्हें काफी कुछ बनाना सिखाया है, जिनमें लूडो गिट्टी, फूल और पॉट भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि लोगों से पॉट के काफी आर्डर मिलते हैं. उन्होंने कहा कि घर का काम करने के साथ-साथ वह इस कौशल के माध्यम से कमाई भी कर लेती हैं."
मंजू का आईडिया जयंती को काम आयाः जयंती कुमारी को इस कौशल का आईडिया देने वाली सहयोगी महिला मंजू ने कहा कि "वह घर पर फ्री होती थी, जिस दौरान उन्होंने जयंती से कुछ अलग काम करने को लेकर बातचीत की. उस बातचीत के दौरान आपसी सहमति से उन्होंने ऊन से बनने वाली चीजों का काम करना शुरू किया. इससे वह घर बैठे घरेलू कामकाज भी निपटा लेती हैं और इस कौशल की मदद से कमाई भी हो जाती है. उन्होंने कहा कि इस काम की मदद से वह अपने सभी खर्च निकाल लेती हैं और आत्मनिर्भर बनकर काफी खुश हैं."
बचपन का देखा काम बना शौक: जयंती कुमारी गांव खुड्डा लोहरा के अपने ससुराल में ऑटो ड्राइवर पति दीपक कुमार, तीन बच्चों और सास के साथ रहती हैं. उन्होंने बताया कि वह बचपन से अपने परिवार के लोगों को ऊन से कई तरह का सामान तैयार करते देखा करती थी. उन्होंने ऊन से बनने वाली कई तरह की आइटम इस्तेमाल भी की. नतीजतन, धीरे-धीरे वह खुद भी ऊन से अलग-अलग तरह का सामान बनाने लगी, जो उनका शौंक बन गया. लेकिन शादी के बाद वह घरेलू कामकाज के अलावा कोई अलग काम नहीं कर पा रही थी, जबकि उनका पसंदीदा काम ऊन से विभिन्न तरह की आकर्षक आइटम बनाना था. ऐसे में उन्होंने अपनी सास रमा कुमारी से अपने कौशल की जानकारी को साझा किया और कहा कि वह इस काम को आगे बढ़ाना चाहती हैं. इसके बाद सास रमा कुमारी और उनके पति दीपक ने उन्हें पूरा सहयोग दिया. नतीजतन आज वह एक कामयाब गृहणी के रूप में सभी घरेलू जिम्मेदारियां को संभालने के साथ-साथ सफल व्यापार भी करती हैं.
अनेक आइटम के मिल रहे ऑर्डर: जयंती कुमारी ने बताया कि "वह अपनी सभी सहयोगी महिलाओं के साथ मिलकर विभिन्न प्रकार का ऊनी सामान तैयार करती हैं और उसे वह प्रदर्शनियों में भी लगाती हैं. नतीजतन, वर्षों से ऊन से बनने वाले सामान को तैयार करने के चलते उन्हें अब एक साथ कई आर्डर मिलते हैं. प्रत्येक ऑर्डर में अलग-अलग ऊनी आइटम की मांग की जाती है, जिससे होने वाली कमाई से वह और उनकी सभी सहयोगी महिलाएं संतुष्ट हैं और व्यापार भी लगातार आगे बढ़ रहा है." उन्होंने बताया कि इस कामकाज में अधिक व्यस्त होने के चलते वह खुद और अन्य सभी सहयोगी महिलाएं मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से दूर हो गई हैं, जिससे सभी काफी खुश हैं.