Newborn Child Custody Case Details: सैनी कॉलोनी की घटना, 20 हजार रुपये के लेनदेन के बाद पड़ोसी ने ससुराल पक्ष को सौंपा बच्चा

पानीपत में महिला की मौत के बाद नवजात की कस्टडी को लेकर दो परिवारों में विवाद। पड़ोसी ने इलाज का खर्च मांगा, पुलिस के समझौते के बाद ससुराल पक्ष को मिला बच्चा।

 
Saini Colony Panipat News 2026

हरियाणा के पानीपत जिले में एक 27 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उसके नवजात बेटे की कस्टडी (देखरेख के अधिकार) को लेकर दो परिवारों के बीच तीखा विवाद खड़ा हो गया। मृतका का पति पहले से ही उससे अलग रहता था। महिला की मौत के बाद जब गांव से ससुराल वाले पहुंचे और बच्चे को अपने साथ ले जाने लगे, तो मौके पर मौजूद पड़ोसियों ने इसका विरोध कर दिया। पड़ोसियों का तर्क था कि उन्होंने महिला के इलाज पर ₹70 हजार खर्च किए हैं और उनके घर कोई संतान नहीं है, इसलिए वे बच्चे को अपने पास रखना चाहते हैं। इस बात पर ससुराल वाले भड़क गए और मामला बढ़ने पर विवाद थाने तक जा पहुंचा।

🩺 23 अक्टूबर को दिया था चौथे बच्चे को जन्म; प्रसव के बाद से लगातार बिगड़ रही थी तबीयत

महिला की पृष्ठभूमि और संघर्ष:

  • मूल निवास व आजीविका: मूल रूप से बिहार के छपरा की रहने वाली संध्या पिछले कई महीनों से पानीपत की सैनी कॉलोनी में रह रही थी। उसके साथ उसकी 10 साल की बेटी, 6 साल की दूसरी बेटी और 3 साल का बेटा भी था। वह एक फैक्ट्री में क्लिपिंग का काम करके अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही थी। उसका पति पंकज उससे अलग रहता था।

  • चौथे बच्चे का जन्म: गत 23 अक्टूबर को संध्या ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया था। यह उसकी चौथी संतान थी। प्रसव के बाद से ही उसकी तबीयत लगातार खराब रहने लगी थी। इस दौरान पड़ोस में रहने वाले संजय और उसके परिवार ने उसकी हरसंभव मदद की और उसे कई अस्पतालों में इलाज के लिए ले गए।

🕯️ एक नवंबर को ब्लीडिंग शुरू होने से हुई मौत; बिहार से पानीपत पहुंचे ससुराल पक्ष के लोग

अंतिम समय और गमगीन माहौल:

  • अचानक बिगड़ी हालत: गत 1 नवंबर को अचानक संध्या को भारी ब्लीडिंग शुरू हो गई। पड़ोसी संजय और उसके परिजन तुरंत उसे सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।

  • अंतिम संस्कार: इसके बाद बिहार से मृतका के ससुराल पक्ष के लोग पानीपत पहुंचे और 3 नवंबर को पानीपत में ही संध्या का अंतिम संस्कार किया गया।

💰 पड़ोसी परिवार ने जताया था भावनात्मक जुड़ाव; इलाज का खर्च मांगने पर हुआ था विवाद

कस्टडी को लेकर तनातनी:

  • 70 हजार खर्च का दावा: गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म तक पड़ोसी संजय और उसके परिवार ने संध्या की देखरेख की थी। संजय के मुताबिक, उन्होंने संध्या के इलाज पर करीब 70 हजार रुपये खर्च किए थे और वे भावनात्मक रूप से मां-बेटे से जुड़ चुके थे। उनके घर बच्चा न होने के कारण वे नवजात को अपनाना चाहते थे।

  • ससुराल वालों का पक्ष: बिहार से आए परिजन विकास और नितेश पासवान जब बच्चे को अपने साथ ले जाने लगे, तो पड़ोसी परिवार ने इलाज का खर्च लौटाने की मांग की, जिससे विवाद बढ़ गया।

🤝 पुलिस की मौजूदगी में हुआ समझौता; 20 हजार रुपये देने पर पड़ोसी ने सौंपा बच्चा

प्रशासनिक और थाना स्तर की कार्रवाई:

  • थाने में समझौता: मामला पुराना औद्योगिक थाना पहुंचा, जहां दोनों पक्षों को बैठाकर बातचीत कराई गई।

  • थाना प्रभारी का बयान: पुराना औद्योगिक थाना प्रभारी अरविंद ने बताया कि पुलिस को इस संबंध में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली थी। दोनों पक्षों के बीच केवल पैसों के लेनदेन का विवाद था, जिसे आपसी सहमति से सुलझा लिया गया। अंततः 20 हजार रुपये के लेनदेन पर सहमति बनने के बाद पड़ोसी परिवार ने नवजात बच्चे को उसके वास्तविक परिजनों को सौंप दिया।