पानीपत: महिला आयोग चेयरपर्सन उषा प्रियदर्शिनी ने किया अस्पताल का निरीक्षण

हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन उषा प्रियदर्शिनी ने पानीपत सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। व्यवस्थाओं में खामी मिलने पर अधिकारियों को लगाई फटकार।

 
student protest and social media content reaction

पानीपतः हरियाणा राज्य महिला आयोग की नवनियुक्त चेयरपर्सन उषा प्रियदर्शिनी ने पदभार संभालने के बाद पहली बार पानीपत का दौरा किया. रेस्ट हाउस पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया. इसके बाद उन्होंने सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जहां स्वास्थ्य सेवाओं में कई गंभीर खामियां सामने आने पर उन्होंने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई. सोशल मीडिया कंटेंट और दिल्ली छात्र आंदोलन पर महिला आयोग की चेयरपर्सन ने बड़ा बयान दिया.

मौके पर डॉक्टर थे अनुपस्थितः निरीक्षण के दौरान चेयरपर्सन ने पाया कि मरीजों को घंटों इंतजार के बावजूद दवाइयां नहीं मिल रही थीं. कई मरीजों के ब्लड टेस्ट लंबित थे, जबकि गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा था. निरीक्षण के समय अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉक्टर भी मौके पर मौजूद नहीं मिले.

अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं, मैनेजमेंट सबसे बड़ी समस्या: अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए उषा प्रियदर्शिनी ने कहा कि "अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि मैनेजमेंट सबसे बड़ी समस्या है." उन्होंने सिविल सर्जन (CMO) को निर्देश दिए कि सभी कमियों को तत्काल दूर किया जाएं. मरीजों, विशेषकर महिलाओं के लिए बैठने और प्रतीक्षा की समुचित व्यवस्था की जाए ताकि उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े." चेयरपर्सन ने अस्पताल प्रशासन को नोटिस जारी करने की बात कहते हुए स्पष्ट किया कि "15 दिन बाद वह दोबारा अस्पताल का निरीक्षण करेंगी. यदि तब भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं मिला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी."

डॉक्टर की गैरमौजूदगी की होगी जांच: अल्ट्रासाउंड कक्ष के निरीक्षण के दौरान डॉक्टर के अनुपस्थित मिलने पर चेयरपर्सन ने इसे गंभीरता से लिया. उन्होंने बताया कि "संबंधित डॉक्टर ने पहले मॉर्चरी में ड्यूटी होने और बाद में कोर्ट जाने की बात कही, लेकिन उनके बयानों में विरोधाभास है. इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी.

महिलाओं की सुरक्षा पर आयोग गंभीर: उषा प्रियदर्शिनी ने कहा कि "महिला आयोग लगातार अस्पतालों, कंपनियों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों का दौरा कर महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल की परिस्थितियों की समीक्षा कर रहा है." उन्होंने कहा कि "जहां भी महिलाओं के साथ उत्पीड़न या दुर्व्यवहार की शिकायत मिलेगी, आयोग तुरंत हस्तक्षेप कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा. उन्होंने समाज से भी महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए जागरूक होने की अपील करते हुए कहा कि "केवल सरकार और आयोग ही नहीं, बल्कि समाज और परिवारों की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को अच्छे संस्कार दें और महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करें.

अश्लील सोशल मीडिया कंटेंट पर भी आयोग करेगा कार्रवाई:
सोशल मीडिया पर महिलाओं द्वारा बनाए जा रहे कथित अश्लील कंटेंट के संबंध में पूछे गए सवाल पर चेयरपर्सन ने कहा कि "यदि ऐसे मामले आयोग के संज्ञान में आते हैं तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं कि कोई भी मर्यादा का उल्लंघन करे."

दिल्ली छात्र आंदोलन पर दी प्रतिक्रिया: दिल्ली में छात्र-छात्राओं के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के सवाल पर उन्होंने कहा कि "लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन कानून और व्यवस्था का पालन भी आवश्यक है." उन्होंने कहा कि "सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर संवेदनशील है और घायल छात्रों का उपचार कराया जा रहा है."

मरीजों ने सुनाई अपनी पीड़ा: निरीक्षण के दौरान कई मरीजों ने भी अपनी समस्याएं चेयरपर्सन के सामने रखीं. रेणु ने बताया कि वह सुबह 8 बजे से अस्पताल में थीं, लेकिन डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें इलाज नहीं मिल सका. राजबाला ने आरोप लगाया कि एक दिन पहले घंटों लाइन में लगने के बावजूद दवा नहीं मिली और दवा वितरण काउंटर बंद कर दिया गया. हरीराम नरवाल ने शिकायत की कि वह हेपेटाइटिस-सी की जांच कराने आए थे, लेकिन अस्पताल में पिछले तीन महीने से जांच किट उपलब्ध नहीं है, जिससे उन्हें बार-बार निराश होकर लौटना पड़ रहा है.