पटियाला हाउस कोर्ट का खुलासा: टिंडर ठगी मामले में न्यायिक अधिकारी फंसी
पटियाला हाउस कोर्ट ने टिंडर के जरिये हुई दोस्ती और 52.81 लाख रुपये की ठगी के एक मामले में बड़ा खुलासा किया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने न केवल आरोपी दीपक वत्स की जमानत याचिका खारिज कर दी बल्कि मामले की जांच एजेंसी और नारनौल में तैनात एक महिला न्यायिक अधिकारी के आचरण पर भी सवाल उठाए हैं।
अदालत ने कहा कि ई-एफआईआर घरेलू सहायिका दीक्षा देवी के नाम पर दर्ज कराई गई थी जबकि वास्तविक पीड़िता नारनौल की न्यायिक अधिकारी हर्षाली चौधरी हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि एक न्यायिक अधिकारी, जिससे कानून के प्रति पूर्ण निष्ठा और पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है, ने खुद सामने आने के बजाय अपनी नौकरानी के नाम से शिकायत दर्ज कराई।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, रिकॉर्ड से दोनों पक्षों के बीच घनिष्ठ संबंधों के संकेत मिलते हैं और यह मामला उन साइबर अपराधों जैसा प्रतीत होता है जिन्हें आमतौर पर हनी ट्रैप कहा जाता है। सुनवाई में अदालत ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अब तक पीड़िता के मोबाइल फोन से पूरी व्हाट्सएप चैट, टिंडर चैट हिस्ट्री, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य एकत्र नहीं किए गए हैं। आरोपी दीपक वत्स ने भी अपना मोबाइल पासवर्ड देने से इनकार कर दिया, जिससे जांच प्रभावित हुई।

