पीएम पोषण योजना में FSSAI पंजीकरण पर संसद में उठे सवाल, सांसद वरुण चौधरी ने घेरा
लोकसभा में कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने पीएम-पोषण (मिड-डे मील) योजना के तहत 11 लाख से अधिक स्कूलों में FSSAI पंजीकरण और भोजन की गुणवत्ता का मुद्दा उठाया।
चंडीगढ़ : लोकसभा में कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (पीएम-पोषण) योजना के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में परोसे जा रहे मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा का अहम मुद्दा उठाया।
उन्होंने सरकार से पूछा कि देश में कितने स्कूलों में पीएम-पोषण योजना के तहत भोजन तैयार कर परोसा जा रहा है, इनमें से कितने स्कूल भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के तहत पंजीकृत हैं और सभी स्कूलों का एफएसएसएआई पंजीकरण कब तक पूरा होगा।
सांसद वरुण चौधरी ने कहा कि FSSAI अधिनियम की धारा-31 के अनुसार खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में स्कूलों ने अभी तक पंजीकरण के लिए आवेदन तक नहीं किया है। उनका कहना था कि सरकार का जवाब स्पष्ट नहीं है, जबकि देश के करोड़ों बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित और मानकों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों का एफएसएसएआई पंजीकरण जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए।
सरकार ने राज्यों की जिम्मेदारी बताई
शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री जयन्त चौधरी ने अपने लिखित उत्तर में कहा कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है और अधिकांश सरकारी स्कूलों का संचालन राज्य सरकारों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन द्वारा किया जाता है। पीएम-पोषण योजना भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से लागू की जा रही है।
उन्होंने बताया कि बाल वाटिका (कक्षा एक से पूर्व) तथा कक्षा एक से आठ तक के सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की समग्र जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की है।
गुणवत्ता और स्वच्छता के लिए जारी हैं दिशा-निर्देश
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने योजना के अंतर्गत बेहतर गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये दिशा-निर्देश पीएम-पोषण योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा राज्यों द्वारा होटल प्रबंधन संस्थानों, खाद्य शिल्प संस्थानों, एफएसएसएआई तथा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से भोजन बनाने वाले रसोइयों एवं सहायकों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि देशभर में कितने स्कूल एफएसएसएआई के तहत पंजीकृत हैं और शेष स्कूलों का पंजीकरण कब तक पूरा होगा।
देशभर में 11 लाख से अधिक स्कूलों में चल रही है पीएम-पोषण योजना
सरकार द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार देशभर के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त 11 लाख से अधिक स्कूलों में पीएम-पोषण योजना के तहत मध्याह्न भोजन परोसा जा रहा है। सबसे अधिक स्कूल उत्तर प्रदेश में हैं, जहां 1,41,703 विद्यालय इस योजना से जुड़े हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश (87,492), महाराष्ट्र (85,206), पश्चिम बंगाल (81,012), बिहार (68,899) और राजस्थान (68,239) का स्थान है।
हरियाणा में 14,210 तथा पंजाब में 19,557 सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पीएम-पोषण योजना संचालित की जा रही है।
बच्चों की सेहत से जुड़ा अहम सवाल
सांसद वरुण चौधरी ने कहा कि मिड-डे मील केवल पोषण का कार्यक्रम नहीं बल्कि करोड़ों बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा विषय है। यदि भोजन तैयार करने और परोसने वाले संस्थानों का FSSAI के तहत पंजीकरण नहीं होगा तो खाद्य सुरक्षा के मानकों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना कठिन होगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की ताकि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा सके।

