PM Wani Scheme MP Dharamvir Singh Question: भिवानी-महेंद्रगढ़ में 279 हॉटस्पॉट, जानें कैसे दुकान से चलाएं पीएम-वाणी वाई-फाई

केंद्र सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पीएम-वाणी योजना के तहत स्थानीय दुकानदारों को पब्लिक डेटा ऑफिस (PDO) बनाने का अवसर दे रही है।
 
ग्रामीण डिजिटल वाईफाई

चंडीगढ़ : गांवों में अब किराना दुकान, साइबर कैफे, कॉमन सर्विस सेंटर या अन्य स्थानीय कारोबारी केवल सामान और सेवाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे सार्वजनिक इंटरनेट कनेक्टिविटी के केंद्र भी बन सकते हैं। केंद्र सरकार सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क ‘पीएम-वाणी’ का दायरा शहरों से आगे ग्रामीण बाजारों और छोटे कस्बों तक बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत स्थानीय दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और उद्यमियों को पब्लिक डेटा ऑफिस (पीडीओ) के रूप में सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट संचालित करने का अवसर दिया जा रहा है।

सरकार का जोर अब सार्वजनिक इंटरनेट सुविधा के विस्तार में स्थानीय स्तर पर निजी भागीदारी बढ़ाने पर है। ग्रामीण बाजारों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक सेवा केंद्रों को भी पीएम-वाणी नेटवर्क के संभावित विस्तार केंद्रों के रूप में देखा जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं और इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर डिजिटल उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

सांसद धर्मबीर सिंह ने संसद में उठाया मुद्दा
भिवानी-महेंद्रगढ़ के भाजपा सांसद धर्मबीर सिंह ने संसद में पीएम-वाणी के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी पहुंच से जुड़ा सवाल उठाया था। इसके जवाब में संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने बताया कि पीएम-वाणी का उद्देश्य सार्वजनिक ब्रॉडबैंड की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर डिजिटल उद्यमिता को बढ़ावा देना भी है। सरकार के इस मॉडल में स्थानीय कारोबारी इंटरनेट सेवा के पारंपरिक उपभोक्ता के बजाय सेवा प्रदाता की भूमिका भी निभा सकेंगे। इससे उन ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक इंटरनेट की सुविधा पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां बड़े सार्वजनिक हॉटस्पॉट नेटवर्क की संख्या सीमित है।

दुकान से संचालित होगा सार्वजनिक हॉटस्पॉट
पीएम-वाणी व्यवस्था में पब्लिक डेटा ऑफिस यानी पीडीओ की भूमिका महत्वपूर्ण है। पीडीओ अपने परिसर में वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित कर सकता है, जबकि पब्लिक डेटा ऑफिस एग्रीगेटर यानी पीडीओए उसे संबंधित नेटवर्क से जोड़ने का काम करता है। इस व्यवस्था के तहत गांव का कोई दुकानदार, कारोबारी या स्थानीय सेवा प्रदाता अपने प्रतिष्ठान पर हॉटस्पॉट स्थापित करके आसपास के लोगों को सार्वजनिक इंटरनेट उपलब्ध करा सकता है। इससे इंटरनेट सुविधा के लिए केवल सरकारी संस्थानों या बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर निर्भरता कम होगी। यह मॉडल स्थानीय कारोबारियों के लिए आय का एक अतिरिक्त डिजिटल अवसर भी पैदा कर सकता है। यानी दुकान पर आने वाला ग्राहक सामान खरीदने के साथ सार्वजनिक वाई-फाई सुविधा का भी इस्तेमाल कर सकेगा।

एक कनेक्शन से कई हॉटस्पॉट की सुविधा
पीएम-वाणी के विस्तार को आसान बनाने के लिए इसके नियमों और तकनीकी व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं। अब सामान्य फाइबर टू द होम यानी एफटीटीएच कनेक्शन और एक ही बैकहॉल के माध्यम से कई एक्सेस प्वाइंट जोड़ने की अनुमति है।

इससे एक इंटरनेट कनेक्शन के आधार पर कई स्थानों तक सार्वजनिक वाई-फाई सेवा पहुंचाना आसान हो सकता है। नेटवर्क से जुड़ने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए क्यूआर आधारित प्रमाणीकरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

इसके अलावा मोबाइल डेटा ऑफलोडिंग, प्रचार सामग्री तथा घर और बिजनेस वाई-फाई को भी पीएम-वाणी से जोड़ने की अनुमति दी गई है। अलग-अलग पीडीओ के बीच म्यूचुअल रोमिंग और एसएसआईडी के मानकीकरण से उपयोगकर्ताओं को नेटवर्क की पहचान और इस्तेमाल में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

200 एमबीपीएस तक के प्लान से लागत नियंत्रण
पीडीओ के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी की लागत को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से टैरिफ संबंधी प्रावधान भी किए गए हैं। ट्राई के टैरिफ आदेश के तहत 200 एमबीपीएस तक की स्पीड वाले रिटेल एफटीटीएच प्लान पीडीओ को संबंधित उपभोक्ता टैरिफ की अधिकतम दोगुनी कीमत पर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य छोटे दुकानदारों और स्थानीय संचालकों के लिए सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट चलाना आर्थिक रूप से ज्यादा व्यावहारिक बनाना है। कम लागत वाली कनेक्टिविटी उपलब्ध होने पर ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे कारोबारी भी इस डिजिटल नेटवर्क का हिस्सा बन सकते हैं।

भिवानी-महेंद्रगढ़ में 279 हॉटस्पॉट
हरियाणा में पीएम-वाणी नेटवर्क की मौजूदगी पहले से दर्ज है। 30 जून तक भिवानी जिले में 228 और महेंद्रगढ़ जिले में 51 हॉटस्पॉट पंजीकृत थे। दोनों जिलों को मिलाकर इनकी संख्या 279 है।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ग्रामीण और छोटे कस्बाई क्षेत्रों में सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के विस्तार की संभावनाएं मौजूद हैं। केंद्र सरकार की भूमिका मुख्य रूप से नीतिगत और नियामकीय सुविधा उपलब्ध कराने की है, जबकि जमीनी स्तर पर नेटवर्क के विस्तार में स्थानीय ऑपरेटरों और निजी भागीदारी की भूमिका अहम रहेगी।

डिजिटल गांव की दिशा में बढ़ता कदम
पीएम-वाणी का ग्रामीण विस्तार केवल इंटरनेट उपलब्ध कराने की योजना नहीं, बल्कि गांवों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने का माध्यम भी बन सकता है। सार्वजनिक वाई-फाई की सुविधा बढ़ने से ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाओं, ऑनलाइन कारोबार और अन्य डिजिटल गतिविधियों तक ग्रामीण आबादी की पहुंच आसान हो सकती है।

आने वाले समय में गांव की किराना दुकान, साइबर कैफे, कॉमन सर्विस सेंटर या अन्य स्थानीय प्रतिष्ठान इंटरनेट के उपभोक्ता के साथ-साथ सार्वजनिक वाई-फाई के संचालक की भूमिका में भी नजर आ सकते हैं। सरकार का स्थानीय भागीदारी वाला यह मॉडल सफल होता है तो गांवों में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार को नई गति मिल सकती है।