Bail Dismissed High Court 2026: कुरुक्षेत्र पेंशनर साइबर ठगी मामला: आरोपी विकास की दूसरी जमानत याचिका भी हाईकोर्ट ने ठुकराई

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ठगी करने वाले आरोपी विकास की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी है। जानिए पूरा मामला।
 
Kurukshetra Pensioner Cyber Fraud

शेयर बाजार में निवेश कर कम समय में भारी मुनाफा कमाने का झांसा देकर भोले-भाले लोगों को ठगने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ न्यायपालिका ने सख्ती बढ़ा दी है। इसी क्रम में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी विकास की दूसरी नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। कुरुक्षेत्र के एक पेंशनर से 1.60 लाख रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी के मामले में आरोपी की संलिप्तता और उसके खिलाफ मानेसर थाने में दर्ज एक अन्य साइबर अपराध के मुकदमे को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने उसे किसी भी प्रकार की राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।

👩‍⚖️ जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल की टिप्पणी: 'केवल हिरासत की अवधि नहीं, अपराध की प्रकृति भी है अहम'

सुनवाई के दौरान अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां:

  • गंभीर प्रभाव: जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल की अदालत ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान समय में साइबर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिनका सीधा और बुरा प्रभाव समाज के एक बड़े वर्ग पर पड़ता है।

  • दोबारा संलिप्तता की आशंका: अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत की अर्जी पर विचार करते समय केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि आरोपी ने कितनी अवधि जेल में बिताई है, बल्कि अपराध की प्रकृति, उसकी गंभीरता और आरोपी के भविष्य में दोबारा ऐसी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका का आकलन करना भी बेहद आवश्यक है।

  • मानेसर का मामला: हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ मानेसर थाने में दर्ज एक अन्य साइबर अपराध के मुकदमे को भी बेहद महत्वपूर्ण माना और कहा कि ऐसी परिस्थितियों में आरोपी की दोबारा अपराध में संलिप्तता की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

📱 व्हाट्सएप संदेश से शुरू हुआ था निवेश का पूरा जाल

ठगी के तरीके और शिकायत का ब्योरा:

  • व्हाट्सएप ऑफर: मामले के विवरण के अनुसार, कुरुक्षेत्र निवासी पेंशनर अरनेश चंद को 29 अप्रैल 2024 को व्हाट्सएप पर 'मिलपेंसिल टॉप' नामक नाम से शेयर बाजार में निवेश करने का एक लुभावना संदेश मिला था।

  • झांसे में फंसे पीड़ित: संदेश में निवेश पर बंपर मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया गया था। इस प्रस्ताव पर विश्वास करके पेंशनर ने अलग-अलग किस्तों के माध्यम से कुल ₹1,60,100 ऑनलाइन निवेश कर दिए।

  • फर्जी भरोसा जीतने की चाल: शुरुआत में ठगों ने पीड़ित को अलग-अलग तारीखों पर ₹92,732.25 निकालने की अनुमति दी, जिससे निवेश योजना पर उनका भरोसा पूरी तरह से बैठ गया।

  • अतिरिक्त टैक्स की मांग: लेकिन जब पीड़ित ने अपनी शेष बची हुई पूरी रकम निकालने का प्रयास किया, तो उन्हें भुगतान करने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद रकम रिलीज करने के एवज में 30 प्रतिशत 'अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर' (Short-term capital gain tax) के नाम पर ₹1,30,640.04 अतिरिक्त जमा कराने का दबाव बनाया गया। जब बार-बार गुहार लगाने के बाद भी पैसे वापस नहीं मिले, तो उन्होंने पुलिस की शरण ली।

🗂️ कुरुक्षेत्र साइबर क्राइम थाने में दर्ज हुई थी FIR, पुलिस दाखिल कर चुकी है चार्जशीट

कानूनी कार्रवाई का क्रम:

  • प्राथमिकी दर्ज: पीड़ित की शिकायत के आधार पर 21 अक्टूबर 2024 को कुरुक्षेत्र साइबर क्राइम थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

  • चार्जशीट दाखिल: इस मामले में पुलिस गहन जांच के बाद पहले ही अदालत में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल कर चुकी है और कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

🧑‍راف बचाव पक्ष और सरकारी वकील की दलीलें

अदालत में दोनों पक्षों द्वारा रखी गई बातें:

  • बचाव पक्ष की दलील: जमानत याचिका के समर्थन में विकास के वकील ने कोर्ट को बताया कि आरोपी 8 दिसंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में है और लगभग 10 महीने 19 दिन जेल में गुजार चुका है। मामले में कुल 11 गवाह हैं, जिनमें से अभी तक सिर्फ एक ही गवाह की गवाही हुई है, इसलिए मुकदमे में लंबा समय लग सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मुख्य आरोपी राधेश्याम है (जिसके नाम पर संयुक्त खाता था) और विकास के खाते में केवल 80 हजार रुपये ही आए थे।

  • सरकारी पक्ष का विरोध: हरियाणा सरकार के वकील ने जमानत का पुरजोर विरोध करते हुए अदालत को बताया कि विकास के खिलाफ मानेसर थाने में भी 29 अक्टूबर 2024 को इसी तरह के गंभीर आरोपों में प्राथमिकी दर्ज है। सरकारी पक्ष ने आशंका जताई कि यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया गया, तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।