PGIMS Rohtak News: राजनीतिक सिफारिश और नियमों की अनदेखी पर HC सख्त, 3 साल की री-अपॉइंटमेंट पर स्टे

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पीजीआईएमएस रोहतक के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की पुनर्नियुक्ति पर लगाई रोक। नियमों की अनदेखी का आरोप।
 
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चंडीगढ़ : हाई कोर्ट ने पंडित बीडी शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीजीआईएमएस), रोहतक के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की तीन साल की पुनर्नियुक्ति पर रोक लगा दी। याचिका में आरोप है कि यह राजनीतिक सिफारिश, नियमों की अनदेखी करके हुई।

अदालत ने 3 अगस्त 2026 के पुनर्नियुक्ति आदेश पर रोक लगाई है। साथ ही, 6 अगस्त को कार्यकारी परिषद के प्रस्ताव के संचालन पर भी तक रोक रहेगी। याचिकाकर्ता ने बताया कि संबंधित अधिकारी 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हो चुके थे। इसके बावजूद, उन्हें 14 मई के अभ्यावेदन और 15 मई की एक पूर्व राजनीतिक पदाधिकारी की सिफारिश पर फिर से नियुक्त किया। सिफारिश में अधिकारी की ओर से पार्टी कार्यकर्ताओं की मदद का उल्लेख था।

तर्क दिया कि सांविधिक पद पर नियुक्ति के लिए राजनीतिक गतिविधियां आधार नहीं हो सकतीं। विवि के सांविधिक प्रावधानों के नियम 2 (डी) के अनुसार, 58 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति को मेडिकल सुपरिंटेंडेंट नियुक्त नहीं किया जा सकता। कार्यकारी परिषद ने आयु सीमा को नजरअंदाज किया। नियमों में छूट देने का परिषद को अधिकार भी नहीं है।

हाई कोर्ट ने सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति हरप्रीत बराड़ की पीठ ने आदेश दिया। साथ ही विवि को नियमानुसार अन्य योग्य को नियुक्त करने की स्वतंत्रता दी है। अगली सुनवाई 4 मार्च 2027 को होगी।