Chandigarh News: पंजाब यूनिवर्सिटी को मिला चौथा स्वचालित मौसम स्टेशन, AI और रिसर्च को मिलेगी नई दिशा

पंजाब यूनिवर्सिटी के रोज गार्डन में IMD के सहयोग से ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन का उद्घाटन हुआ। यह 24 घंटे मौसम का सटीक डेटा जुटाएगा और रिसर्च में मदद करेगा।

 
चंडीगढ़ न्यूज हिंदी

चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में मौसम संबंधी अनुसंधान और पूर्वानुमान को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. विश्वविद्यालय के रोज गार्डन में भारतीय मौसम विभाग के सहयोग से स्थापित स्वचालित मौसम स्टेशन यानी कि ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन का सोमवार को उद्घाटन किया गया. उद्घाटन पंजाब यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. रेनू विग ने आईएमडी चंडीगढ़ के निदेशक एवं प्रमुख सुरेंद्र पाल की उपस्थिति में किया. यह चंडीगढ़ में स्थापित चौथा स्वचालित मौसम स्टेशन है और पूरी तरह मानव रहित प्रणाली पर आधारित है.

24 घंटे जुटाएगा मौसम का सही डेटा: यह स्वचालित मौसम स्टेशन बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के चौबीसों घंटे मौसम संबंधी आंकड़े रिकॉर्ड करेगा. स्टेशन वायु तापमान, सापेक्षिक आर्द्रता, वायुमंडलीय दबाव, वर्षा, हवा की गति और दिशा जैसे प्रमुख मौसमीय मानकों की लगातार निगरानी करेगा. इन आंकड़ों के आधार पर मौसम पूर्वानुमान अधिक सटीक होगा और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी.

शोध और आपदा प्रबंधन में होगा उपयोग: विश्वविद्यालय के अनुसार इस स्टेशन से प्राप्त डेटा पर्यावरण विज्ञान, मौसम विज्ञान, कृषि, जल विज्ञान, भूगोल, सिविल इंजीनियरिंग, जनस्वास्थ्य और भू-विज्ञान जैसे विषयों में अनुसंधान के लिए उपयोगी होगा. इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग आधारित शोध को भी नई दिशा मिलेगी. मौसम संबंधी सटीक आंकड़े आपदा प्रबंधन और मौसम आधारित योजनाओं के निर्माण में भी सहायक साबित होंगे.

मौसमीय बदलावों के अध्ययन में मिलेगी मदद: मौसम विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ने कहा कि, "स्टेशन से लगातार एकत्र होने वाला डेटा वर्षा, गरज और लू जैसी मौसमी घटनाओं के पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाएगा. साथ ही जलवायु परिवर्तन, शहरी ऊष्मा प्रभाव और वर्षा के बदलते पैटर्न पर दीर्घकालिक अध्ययन में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा."

"शिक्षा और अनुसंधान को मिलेगा नया आधार": पंजाब यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. रेनू विग ने कहा कि, "यह सुविधा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अनुसंधान ढांचे को और मजबूत करेगी. विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को वास्तविक समय का मौसम संबंधी डेटा उपलब्ध होगा, जिससे मौसम, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों पर बेहतर अध्ययन और अनुसंधान संभव होगा. यह पहल भविष्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को नई गति देगी."