पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता स्वर्ण पदक, रचा इतिहास

रेवाड़ी की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला शॉट पुट F-57 वर्ग में 9.81 मीटर थ्रो कर गोल्ड मेडल जीता। पढ़ें उनके संघर्ष की पूरी कहानी।

 
प्रेरणादायक कहानी हरियाणा

रेवाड़ी : हरियाणा के रेवाड़ी की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स के महिला पैरा शॉट पुट एफ-57 वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो कर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया। उनकी यह उपलब्धि संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल बन गई है।

महेंद्रगढ़ जिले के छितरौली गांव की रहने वाली शर्मिला धनखड़ का जीवन चुनौतियों से भरा रहा। महज दो वर्ष की उम्र में पोलियो के कारण उनका एक पैर प्रभावित हो गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार होने के कारण उनका बेहतर इलाज नहीं हो सका। पिता छोटे किसान हैं, जबकि उनकी मां दृष्टिबाधित हैं।


26 वर्ष की उम्र में पहले पति ने उन्हें दो बेटियों सहित घर से निकाल दिया। इसके बाद वह मायके लौट आईं। 28 वर्ष की उम्र में उन्होंने अजीत से दूसरी शादी की, जिन्होंने उन्हें पैरा एथलेटिक्स में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर साथ दिया।

साल 2018 में हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान उन्हें राज्य की पहली महिला कंडक्टर के रूप में नौकरी मिली, लेकिन हड़ताल समाप्त होने के बाद नौकरी चली गई। इस घटना ने उन्हें गहरा झटका दिया। तभी उन्होंने ऐसा मुकाम हासिल करने का संकल्प लिया, जिसे कोई उनसे छीन न सके।


34 वर्ष की उम्र में उन्होंने रेवाड़ी में कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में एफ-57 वर्ग के सीटेड शॉट पुट की ट्रेनिंग शुरू की। आर्थिक तंगी इतनी थी कि वर्ष 2023 में प्रशिक्षण का खर्च उठाने के लिए परिवार को अपना घर तक बेचना पड़ा और किराए के मकान में रहना पड़ा, लेकिन शर्मिला ने अभ्यास नहीं छोड़ा।

वर्ष 2022 में इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित पैरा कॉमनवेल्थ गेम्स में वह चौथे स्थान पर रहीं। इसके बाद उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर अपने संघर्ष को सफलता की नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।


शर्मिला की दोनों बेटियां भी खेलों में अपना भविष्य बना रही हैं। बड़ी बेटी अनुज (17) जेवलिन थ्रो और छोटी बेटी लक्ष्मी (13) लॉन्ग जंप की स्टेट लेवल खिलाड़ी हैं। शर्मिला की सफलता आज उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।