Kurukshetra Dukh Bhanjan Mahadev Temple: कुरुक्षेत्र के प्राचीन श्री दुख भंजन महादेव मंदिर में जलाभिषेक, जानें इस सिद्ध पीठ की मान्यताएं

सावन सोमवार और त्रयोदशी के दुर्लभ संयोग पर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के अति प्राचीन श्री दुख भंजन महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

 
हरियाणा धार्मिक समाचार

कुरुक्षेत्र: पवित्र सावन मास के सोमवार और त्रयोदशी तिथि के विशेष संयोग पर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र पूरी तरह शिवमय नजर आई. तड़के से ही कुरुक्षेत्र के अति प्राचीन एवं सिद्ध पीठ श्री दुख भंजन महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा. महादेव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु घंटों कतारों में खड़े रहे.

भक्ति में डूबे श्रद्धालु: मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित किया. भक्तों ने महादेव से सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की. सावन सोमवार को मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचे.

पौराणिक मान्यताओं पर पुजारी ने डाला प्रकाश: श्री दुख भंजन महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित सुशील कुमार शास्त्री ने मंदिर की मान्यताओं के बारे में कहा कि, "सावन माह में महादेव की पूजा करने से विशेष एवं मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. कुरुक्षेत्र का श्री दुख भंजन मंदिर ऐसा धाम है, जहां से कोई भी भक्त निराश नहीं लौटता.मंदिर में सावन सोमवार को भगवान शिव का विधिवत पूजन और जलाभिषेक करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने और शीघ्र विवाह के योग बनने की धार्मिक मान्यता है. लड़कियों के विवाह के योग से लेकर जीवन की विभिन्न मनोकामनाओं तक, भक्त यहां महादेव का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं."

मनोकामना लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु: मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निसंतान दंपती भी संतान सुख की कामना लेकर यहां भगवान शिव की आराधना करते हैं. इसके अलावा भक्त जीवन के विभिन्न कष्टों और परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं. मंदिर का नाम भी भक्तों के दुखों का भंजन करने की मान्यता से जुड़ा बताया जाता है.

पूजा-अर्चना के लिए उमड़ी भीड़: सोमवार के साथ त्रयोदशी तिथि के संयोग को श्रद्धालुओं ने विशेष धार्मिक अवसर माना. मंदिर में सुबह से ही पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का सिलसिला चलता रहा. श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का स्मरण करते हुए परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की.

मंदिर प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम: सावन शिवरात्रि को लेकर मंदिर प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं. पंडित सुशील कुमार शास्त्री ने बताया कि, "कल शिवरात्रि पर सुबह 5 बजे से रात तक निरंतर जलाभिषेक चलेगा. श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए दर्शन, सुरक्षा और कतारों के सुचारू संचालन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं."