Shrikrishna Ayush University Foundation Day: कुलपति ने कहा—श्रीमद्भगवद्गीता सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है

श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय में मनाया गया स्थापना दिवस। छात्र अभिमन्यु ने श्रीमद्भगवद्गीता के संवाद पर दी प्रस्तुति।
 
Shrimad Bhagavad Gita teachings

कुरुक्षेत्र : श्री कृष्णा आयुष विश्विद्यालय में शुक्रवार को स्थापना दिवस मनाया गया । जिसमें छात्र - छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रस्तुत की । इसी कड़ी में बीएएमएस अंतिम वर्ष के छात्र अभिमन्यु द्वारा श्रीमदगीता पर आधारित भगवान श्री कृष्ण एवं अर्जुन संवाद की प्रभावशाली प्रस्तुति की गई। इस अवसर पर अभिमन्यु की प्रशंसा करते हुए कुलपति वैध करतार सिंह ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला का मार्गदर्शन करने वाला महान ग्रंथ है। गीता में अर्जुन की मनःस्थिति के माध्यम से जीवन की अनेक महत्वपूर्ण परिस्थितियों और उनके समाधान का संदेश मिलता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी सामान्य परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय व्यक्ति को पहले रुककर स्थिति का मूल्यांकन करना चाहिए, गंभीरता से विचार करना चाहिए, संवाद के माध्यम से सही पक्ष को समझना चाहिए और इसके बाद उचित निर्णय लेकर आगे बढ़ना चाहिए। इससे निर्णय अधिक संतुलित और प्रभावी हो सकते हैं।

कुलपति ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल एवं त्वरित प्रतिक्रिया आवश्यक होती है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में धैर्य, विवेक और संवाद को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे गीता के इस महत्वपूर्ण संदेश को अपने जीवन में अपनाएं और शिक्षा, करियर तथा व्यक्तिगत जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना धैर्य, विवेक और सकारात्मकता से करें।