Haryana ACB Action Sonipat: रिश्वतखोरी में सोनीपत वक्फ बोर्ड के दो कर्मचारी गिरफ्तार, रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी पुलिस
सोनीपत। हरियाणा में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक और बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सोनीपत वक्फ बोर्ड कार्यालय में तैनात एस्टेट ऑफिसर मोहम्मद सलीम और रेंट क्लर्क मोहम्मद ताहिर को रिश्वत की भारी रकम लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।
दोनों अधिकारियों पर शिकायतकर्ता से कुल तीन लाख रुपये की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप है। जींद एसीबी की विजिलेंस टीम ने त्वरित जाल बिछाकर दोनों कर्मचारियों को गोहाना स्थित प्रसिद्ध 'श्याम सुंदर मिष्ठान भंडार' से एक लाख 16 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया।
📄 1 लाख 84 हजार की दी थी रसीद, कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेगी ACB
एसीबी जांच में सामने आया है कि तीन लाख रुपये की कुल मांग में से आरोपियों ने शिकायतकर्ता को केवल एक लाख 84 हजार रुपये की ही आधिकारिक रसीद बनाकर दी थी, जबकि बाकी बची रकम वे अपनी जेब में रिश्वत के तौर पर ऐंठ रहे थे।
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पहचान: गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों की पहचान सोनीपत वक्फ बोर्ड कार्यालय के एस्टेट ऑफिसर मोहम्मद सलीम और रेंट क्लर्क मोहम्मद ताहिर के रूप में हुई है।
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अदालत में पेशी: एसीबी की टीम दोनों आरोपियों को बुधवार को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की वैधानिक प्रक्रिया अपनाएगी। रिमांड के दौरान रिश्वतखोरी के इस पूरे खेल से जुड़े अन्य पहलुओं और लेन-देन की गहन पूछताछ की जाएगी।
☕ स्वीट्स शॉप पर बनाया गया था जाल, शिकायत मिलते ही हरकत में आई जींद एसीबी
जींद विजिलेंस इंस्पेक्टर महेंद्र ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें एसीबी कंट्रोल रूम के माध्यम से वक्फ बोर्ड के अधिकारियों द्वारा रिश्वत मांगे जाने की लिखित शिकायत प्राप्त हुई थी।
शिकायत का सत्यापन करने के बाद एसीबी की विशेष टीम गठित की गई। जैसे ही शिकायतकर्ता रिश्वत के 1 लाख 16 हजार रुपये लेकर गोहाना के गोहाना स्थित मिष्ठान भंडार पहुंचा, पहले से घात लगाकर बैठी एसीबी टीम ने दोनों आरोपियों को पैसे स्वीकार करते ही गिरफ्तार कर लिया।
🔍 पूछताछ में खुल सकते हैं कई बड़े राज, अन्य अफसरों की संलिप्तता की भी जांच
विजिलेंस अधिकारी इंस्पेक्टर महेंद्र ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस रिमांड के दौरान कड़ाई से पूछताछ की जाएगी।
इस दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि क्या इस रिश्वतखोरी के सिंडिकेट में वक्फ बोर्ड या अन्य विभागों का कोई अन्य बड़ा अधिकारी भी शामिल है। पुलिस का कहना है कि यदि पूछताछ और जांच में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उसे भी इस मामले में सह-आरोपी बनाकर तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा।