RTI कानून: अब कोई अधिकारी नहीं रोक सकता आवेदन, सूचना आयोग का आदेश

राज्य सूचना आयोग का बड़ा फैसला! कोई भी अधिकारी आरटीआई आवेदन देने से नहीं रोक सकता। शाहाबाद शुगर मिल्स केस पर आयोग ने SPIO को लगाई फटकार।
 
आरटीआई आवेदक अधिकार

पंचकूला: राज्य सूचना आयोग ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि कोई भी राज्य लोक सूचना अधिकारी (एसपीआईओ) किसी नागरिक को आरटीआई आवेदन दाखिल करने से न तो रोक सकता है और न ही किसी प्रकार का प्रतिबंध लगा सकता है. आयोग ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में एसपीआईओ को ऐसी कोई शक्ति प्रदान नहीं की गई है. वह केवल अधिनियम के तहत निर्धारित दायरे में ही काम कर सकता है. आयोग ने यह टिप्पणी कुरुक्षेत्र जिले की शाहाबाद शुगर मिल्स लिमिटेड से जुड़े मामले में कही है.

आरटीआई में मांगी जानकारी:मामले के शिकायतकर्ता संदीप शरण ने 12 नवंबर 2025 को आरटीआई आवेदन देकर जानकारी मांगी थी. आरोप के अनुसार निर्धारित अवधि में पूरी और सही सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर उन्होंने राज्य सूचना आयोग में शिकायत दायर की. सुनवाई 12 जून 2026 को राज्य सूचना आयुक्त डा अजय कुमार सूरा के समक्ष हुई. सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि उन्हें अभी भी वांछित सूचना नहीं मिली है और सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएं. वहीं, शाहाबाद शुगर मिल्स की ओर से उपस्थित विधिक सहायक ने सूचना उपलब्ध करा दिए जाने का दावा किया.

आरटीआई आवेदन से रोकने का प्रयास किया:मामले संबंधी रिकार्ड की जांच के बाद आयोग ने पाया कि एसपीआईओ ने 21 जनवरी 2026 के एक पत्र के माध्यम से शिकायतकर्ता को बार-बार आरटीआई आवेदन देने से रोकने का प्रयास किया था. पत्र में यह भी चेताया गया था कि यदि शिकायतकर्ता आरटीआई आवेदन देना बंद नहीं करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. आयोग ने एसपीआईओ के इस रवैए पर गंभीर आपत्ति जताई है. राज्य सूचना आयुक्त डा अजय कुमार सूरा ने अपने आदेश में कहा कि आरटीआई अधिनियम के तहत एसपीआईओ केवल एक वैधानिक माध्यम है. उसे किसी नागरिक को भविष्य में आरटीआई आवेदन देने से रोकने, प्रतिबंधित लगाने या “ब्लैकलिस्ट” करने का कोई अधिकार नहीं है.

प्रत्येक आवेदन पर अलग अलग विचार करें: राज्य सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई आवेदन अत्यधिक दोहराव वाला या परेशान करने वाला प्रतीत होता है, तब भी प्रत्येक आवेदन पर अलग-अलग विचार करना होगा और सूचना देने या अधिनियम की धारा 8 एवं 9 के तहत वैधानिक कारणों से अस्वीकार करने का निर्णय लेना होगा. आयोग ने शिकायतकर्ता के अनुरोध पर मामले को द्वितीय अपील में परिवर्तित कर दिया है.

सूचना निशुल्क उपलब्ध कराने के आदेश: राज्य सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में शाहाबाद शुगर मिल्स के एसपीआईओ को 12 नवंबर 2025 की आरटीआई अर्जी से संबंधित संपूर्ण सूचना 15 दिनों के भीतर सत्यापित रूप में निशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. आयोग ने एसपीआईओ से यह भी पूछा है कि वह बताएं कि आरटीआई कानून की कौन सी धारा उन्हें किसी आवेदक को आरटीआई आवेदन देने से रोकने का अधिकार देती है. अब मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित है.