Bal Vivah Mukt Bharat: प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए लाडो पंचायत और सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन की अनूठी पहल
बाल एवं महिला अधिकार कार्यकर्ता सुनील जागलान ने बाल विवाह के खिलाफ 'बच्ची है, दुल्हन नहीं' अभियान शुरू किया है। जानिए इस गंभीर समस्या और आंकड़ों की पूरी डिटेल।
देश में बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक कुरीति और उसकी भयावह सच्चाई के खिलाफ प्रख्यात बाल एवं महिला अधिकार कार्यकर्ता सुनील जागलान ने एक बड़ा और निर्णायक अभियान शुरू किया है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 15 लाख बालिकाओं का विवाह 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले ही कर दिया जाता है। यह दुखद आंकड़ा न सिर्फ मासूमों का बचपन छीन रहा है, बल्कि हजारों लड़कियों को मानव तस्करी और भयानक शोषण के अंधकारमय जाल में भी धकेल रहा है।
📊 एनएफएचएस के डराने वाले आंकड़े: पश्चिम बंगाल और बिहार सबसे आगे, हरियाणा में भी आ चुकी हैं सैकड़ों शिकायतें
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के अनुसार, देश में 20 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में बाल विवाह की दर अभी भी 20.1 प्रतिशत बनी हुई है। राज्यों की बात करें तो पश्चिम बंगाल में यह दर 36.4%, बिहार में 34.6% और त्रिपुरा में 34% है, जो इसे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बनाते हैं। हालांकि हरियाणा में यह दर 11.9 प्रतिशत है, फिर भी राज्य में पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों शिकायतें दर्ज की गई हैं। अकेले अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 402 शिकायतें सामने आई हैं, जबकि पिछले पाँच वर्षों में 1,700 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
✊ 'बच्ची है, दुल्हन नहीं' अभियान से बदलाव की उम्मीद: प्रधानमंत्री के विजन को मिल रहा है समर्थन
इस विकट स्थिति से निपटने के लिए सुनील जागलान ने 'सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन' के बैनर तले 'बच्ची है, दुल्हन नहीं' अभियान की शुरुआत की है, जो 'बाल आजादी अभियान' के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बाल विवाह मुक्त भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। लाडो पंचायत के माध्यम से लड़कियों की विवाह योग्य आयु बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री को 10 हजार से अधिक पत्र लिखवाए गए हैं। सुनील जागलान का यह स्पष्ट संदेश है कि बच्ची कोई दुल्हन नहीं होती, बल्कि वह शिक्षा, खेल, अपने सपनों और स्वतंत्रता की सच्ची हकदार है।