Supreme Court Relief: 'ऑपरेशन सिंदूर' टिप्पणी मामले में प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को बड़ी राहत; हरियाणा सरकार ने मुकदमा चलाने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ आपराधिक मामले को बंद करने का आदेश दिया है। हरियाणा सरकार ने अभियोजन की मंजूरी (Prosecution Sanction) देने से इनकार कर दिया। जानें 'ऑपरेशन सिंदूर' पर की गई टिप्पणी का पूरा विवाद।

 
सुप्रीम कोर्ट जस्टिस सूर्यकांत

सोशल मीडिया पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में अशोका विश्वविद्यालय (Ashoka University) के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद (Ali Khan Mahmudabad) को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट को सोमवार को हरियाणा सरकार ने बताया कि उसने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति (प्रोसिक्यूशन सैंक्शन) देने से इनकार कर दिया है। हरियाणा सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बताया कि “एक बार की उदारता के रूप में राज्य सरकार ने अभियोजन की मंजूरी नहीं दी है और मामला बंद कर दिया है।”
 
यह जानकारी मिलने के बाद मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सोनीपत की अदालत में लंबित आपराधिक मामले को बंद करने का आदेश दे दिया। हालांकि अदालत ने महमूदाबाद को भविष्य में सावधानी बरतने की सलाह भी दी।


पीठ ने पहले टिप्पणी की थी कि यदि सरकार ने उदारता दिखाते हुए अभियोजन की मंजूरी नहीं दी है तो इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया पर कुछ भी लिख सकता है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी भी जरूरी है।

दरअसल, हरियाणा पुलिस ने पिछले वर्ष 18 मई को महमूदाबाद को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज हुई थीं—एक शिकायत रेणु भाटिया (हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष) की ओर से और दूसरी सोनीपत जिले के राय क्षेत्र के एक सरपंच की शिकायत पर। महमूदाबाद पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 353, 79 और 196 के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सोशल मीडिया पोस्ट में सेना की प्रेस ब्रीफिंग को “ऑप्टिक्स” यानी दिखावा बताया था।

उल्लेखनीय है कि उस समय व्योमिका सिंह (IAF विंग कमांडर) और कर्नल सोफिया कुरैशी (Sofiya Qureshi) विदेश सचिव विक्रम मिसरी (Vikram Misri) के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर मीडिया ब्रीफिंग में शामिल हुई थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले हरियाणा पुलिस की एसआईटी द्वारा प्रोफेसर के मोबाइल फोन सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जाने पर भी कड़ी टिप्पणी की थी और कहा था कि जांच एजेंसी ने इस मामले में खुद को गलत दिशा में ले लिया। अदालत ने एसआईटी को केवल दर्ज एफआईआर के आधार पर ही जांच करने का निर्देश दिया था।

इसके बाद 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को इस मामले में दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने और आरोप तय करने की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी थी। अब हरियाणा सरकार द्वारा अभियोजन की अनुमति न देने के बाद अदालत ने मामले को बंद कर दिया है।