सूरजकुंड मेला समापन: राज्यपाल असीम घोष ने शिल्पकारों को नवाजा, 20 लाख से अधिक पर्यटकों ने बढ़ाई मेले की रौनक; मिस्र रहा पार्टनर नेशन
फरीदाबाद में 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले का समापन। राज्यपाल असीम कुमार घोष ने इसे 'लोकल से ग्लोबल' आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण बताया। मेले में इस बार 20 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे और 50 देशों के कलाकारों ने हिस्सा लिया।
फरीदाबाद : राज्यपाल असीम कुमार घोष ने कहा कि सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का मजबूत व जीवंत उदाहरण है। यह लोकल से ग्लोबल आत्मनिर्भर भारत के मंत्र से प्रेरित है। सूरजकुंड मेला एक वाइब्रेंट प्लेटफार्म के तौर पर उभर रहा है। जहां ट्रैडिशन और नवाचार मिलकर काम करते हैं। राज्यपाल प्रोफैसर असीम कुमार घोष रविवार को 39 वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव के समापन अवसर पर अपना संबोधन दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि मेले से ही लोकल शिल्पकारों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ग्लोबल पहचान मिली है और प्रदेश में मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में सजग है। इससे पहले राज्यपाल घोष व उनकी पत्नी मित्रा घोष ने सहकारिता, पर्यटन एवं विरासत मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल, मेयर प्रवीण बत्रा जोशी के साथ मेले का अवलोकन किया। अवलोकन दौरान सभी मेहमानों का आपणा घर पर हरियाणवी पगड़ी से स्वागत किया गया।
राज्यपाल ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए शिल्पकारों दृढ़ को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया। सूरजकुंड शिल्प मेला को भारतीय सभ्यता और संस्कृति विरासत तथा आत्मनिर्भरता की सामूहिक इच्छा को खूबसूरती से प्रदर्शित करने वाला बताते हुए उन्होंने कहा कि यह मेला विविधता में एकता की भावना को बल दे रहा है। देश और दुनिया भर के कारीगरों, बुनकरों और लोक कलाकारों के कौशल, निश्चय व रचनात्मकता की झलक मेले में दिखाई दी है।
उन्होंने कहा कि मेले में मिस्र ने चौथी बार पार्टनर नेशन के तौर पर हिस्सा लिया है जिससे हमारे सांझा सांस्कृतिक और सभ्यता के संबंधों को मजबूती मिली है। वहीं इस बार मेले में थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय ने भी अपनी वाइब्रेंट लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित कर मेले को बेहतर बनाया है। मेले में 50 से ज्यादा देशों की लगभग 800 कलाकारों और कारीगरों ने हिस्सा लेकर पिछले वर्षों की तुलना में मेले के बढ़ते ग्लोबल रुतबे को मजबूती प्रदान की है। यह मेला पारंपरिक शिल्प के संरक्षण को लेकर अंतर्राष्ट्रीय संस्कृति सहयोग को बढ़ावा देने में सहायक है। सूरजकुंड मेला दुनिया के संस्कृति और पर्यटन के नक्शे पर अपनी गहरी छाप छोड़ता रहेगा। उन्होंने देश के शिल्पकारों से आह्वान किया कि वे भारतीय कला, संस्कृति को आगे बढ़ाने की दिशा में अपना योगदान दें।
लोकल प्रोडक्ट्स को सही मायने में ग्लोबल प्लेटफॉर्म दे रहा शिल्प महोत्सव : अरविंद शर्मा
सहकारिता एवं पर्यटन मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं है बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। यह वह मंच है जहां परम्परा और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखाई देता है। यहां हर कलाकृति केवल एक वस्तु नहीं होती बल्कि उसके पीछे किसी कारीगर की पीढ़ियों से चली आ रही परम्परा, उसकी मेहनत, उसका सपना और उसकी पहचान जुड़ी होती है।
सूरजकुंड शिल्प महोत्सव आत्मनिर्भरता को मजबूत करने, एक्सपोर्ट की संभावना को बढ़ाने और लोकल प्रोडक्ट्स को सही मायने में ग्लोबल प्लेटफॉर्म देने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि शनिवार तक इस मेले में 17 लाख 88 हजार लोगों ने विजिट किया और आज रविवार को करीब 3 लाख लोग पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मेले की थीम लोकल से ग्लोबल आत्मनिर्भर भारत की पहचान रही। आज भारत का कारीगर केवल अपने गांव या राज्य तक सीमित नहीं है बल्कि उसका हुनर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहा है।
इंस्पैक्टर जगदीश की शहादत सदैव स्मरणीय रहेगी
उन्होंने 7 फरवरी को झूला हादसे दौरान पर्यटकों की जान बचाते हुए वीरगति को प्राप्त हुए शहीद इंस्पैक्टर जगदीश प्रसाद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी शहादत सदैव स्मरणीय रहेगी।

