सूरजकुंड मेला: नेशनल अवार्डी गिर्राज प्रसाद की टेराकोटा कला बनी आकर्षण, जानें क्यों खास है उनकी मिट्टी की कारीगरी

सूरजकुंड मेले में छाए नेशनल अवार्डी गिर्राज प्रसाद के टेराकोटा उत्पाद। बिना मशीन के 850°C पर पकाकर बनाई गई इको-फ्रेंडली मूर्तियां और गार्डन पॉट्स बने लोगों की पहली पसंद।
 
वोकल फॉर लोकल हरियाणा
फरीदाबाद : फरीदाबाद में आयोजित विश्व प्रसिद्ध सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में इस वर्ष टेराकोटा कला विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मेले में पहुंचे शिल्पकार गिर्राज प्रसाद अपनी अनोखी और पर्यावरण अनुकूल कारीगरी से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। उन्हें वर्ष 2011 में नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है, जिससे उनकी कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

गिर्राज प्रसाद मिट्टी से घरों की सजावट के लिए विभिन्न प्रकार के शोपीस, मूर्तियां और खासतौर पर बगीचों के लिए अलग-अलग डिजाइनों के गमले तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका अधिकतर काम गार्डन प्लांटेशन से जुड़ा है और लोग उनके बनाए आकर्षक गमलों को काफी पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा वे किचन में इस्तेमाल होने वाले कुछ उपयोगी सामान भी तैयार करते हैं। 

उन्होंने जानकारी दी कि टेराकोटा उत्पाद व्हाइट सीमेंट और मिट्टी के मिश्रण से बनाए जाते हैं। तैयार वस्तुओं को लगभग 850 डिग्री तापमान पर पकाया जाता है, जिससे वे मजबूत और टिकाऊ बनते हैं। उनकी पूरी कारीगरी हाथों से की जाती है और इसमें किसी भी मशीन का प्रयोग नहीं होता। पर्यावरण संरक्षण के विषय में उन्होंने कहा कि यह कला पूरी तरह इको-फ्रेंडली है। यदि कोई टेराकोटा उत्पाद टूट भी जाए तो उसे क्रश करके दोबारा मिट्टी में मिलाया जा सकता है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता। 

2008 में मिल चुका है स्टेट अवार्ड 

गिर्राज प्रसाद को वर्ष 2008 में स्टेट अवार्ड मिल चुका है। 2009 में उन्होंने 26 जनवरी की परेड के लिए वस्त्र मंत्रालय की झांकी में भी योगदान दिया था। इसके अलावा 2023 में आयोजित जी-20 कार्यक्रम में भी उन्हें अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिला। उनका कहना है कि “वोकल फॉर लोकल” अभियान से स्थानीय कारीगरों को नई पहचान और प्रोत्साहन मिल रहा है।