Yamunanagar Crime News: यमुनानगर में खैर माफिया और वन रक्षकों की मिलीभगत का आरोप, दरोगा ने दिए जांच के आदेश

डारपुर बीट में खैर के पेड़ों की कथित कटाई पर विवाद। ग्रामीणों का आरोप- वन रक्षकों की छत पर मिली 50 क्विंटल खैर की लकड़ी।
 
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यमुनानगर : यमुनानगर में खैर के जंगल पर सवाल उठे हैं और सवाल सीधे वन्यजीव विभाग की कार्यप्रणाली पर है। डारपुर बीट में खैर के पेड़ों की कथित अवैध कटाई को लेकर ग्रामीणों ने ऐसे सबूत सामने रखे हैं, जिन्होंने विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि डारपुर के जंगल से करीब 200 से 300 खैर के पेड़ काटे गए हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने वन्यजीव विभाग के गार्ड प्रदीप और कर्मचारी आरिफ पर कथित तौर पर खैर माफियाओं के साथ मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है।

ग्रामीणों ने दावा किया कि विभाग के रखवालों के घर की छत पर ही खैर के पेड़ों के कटे हुए टुकड़े पड़े हैं। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 40 से 50 क्विंटल खैर की लकड़ी वहां मौजूद है। अब सवाल यह है कि जिस विभाग पर जंगल और वन्य संपदा की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, अगर उसी के कर्मचारियों के घर की छत पर कथित तौर पर खैर की लकड़ी मिल रही है, तो इसकी निगरानी कौन कर रहा है?ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे खैर की कथित तस्करी की सूचना विभाग को देते हैं, तो कार्रवाई करने की बजाय उन पर ही झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। 

मामले पर डारपुर बीट के दरोगा नरेश कुमार ने कहा है कि अगर किसी वन्यजीव विभाग के कर्मचारी की छत पर खैर के पेड़ या लकड़ी मिलती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि खैर की अवैध कटाई को लेकर विभाग ने पूरी सख्ती बरती है। अब बड़ा सवाल यही है जंगल से खैर के पेड़ आखिर कौन काट रहा है? अगर ग्रामीणों के आरोप सही हैं, तो विभागीय निगरानी पर जवाबदेही तय होगी या मामला सिर्फ जांच की फाइलों तक सीमित रह जाएगा?