प्रधानमंत्री के सनटेनेबल खेती के फॉर्मूले का किसानों ने किया स्वागत
भिवानी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सनसेंनेबल खेती पर जोर देते हुए कम संसाधनों में बगैर उर्वरकों के प्राकृतिक खेती करने पर जोर दिया है। उन्होंने पर ड्राप मोर क्रॉप और मिशन लाईफ जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं का ध्यान रखते हुए किसानों को अपनी आय बढ़ाने की अपील की है। प्रधानमंत्री की इस सनटेनेबल खेती के विचारों का भिवानी जिले के किसानों ने भी स्वागत किया है। किसानों का कहना है कि सनटेनेबल खेती अब समय की जरूरत है।
भिवानी जिला के गांव तालु के युवा किसान अनिल पंघाल, संदीप शर्मा, गांव नांगल के किसान मोहित मान, गांव जाटु लोहारी के किसान पुरूषोत्तम तंवर, गांव मिताथल के किसान जितेंद्र धारीवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती को कम संसाधनों में करने की जो बात कही है, वह आज के समय की जरूरत है।
वे अपने में सनटेनेबल खेती को पहले से भी अपनाते रहे है। अब इस बिंदु पर वे और भी ध्यान देंगे। इसके लिए वे डीएपी, यूरिया की बजाए गोबर की खाद व केचुएं की खाद का प्रयोग करेंगे, ताकि जो फसल पैदा हो, वह जहरीली ना हो। इसके साथ ही पानी बचाने के लिए विभिन्न फसल चक्रों को अपनाएंगे, इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रही तथा आने वाली पीढिय़ों के लिए जमीन बची रहे व राष्ट्र उन्नति कर सकें।
किसानों ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सनटेनेबल खेती की जो बात कही है, उसका वे समर्थन करते है। किसान को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए सनटैनेबल खेती के माध्यम से खेती की लागत कम होगी तथा कम संसाधनों में खेती की जा सकेंगी, इससे उत्पन्न होने वाली फसलें भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होगी तथा देश का स्वास्थ्य का खर्च भी बचेगा।
इसके साथ ही हमारा पर्यावरण भी स्वस्थ रहेगा। कीटनाशकों के प्रयोग की बजाए वे प्राकृतिक कीटनाशकों का प्रयोग करेंगे। इससे फसलों के लिए महत्वपूर्ण कीट भी जीवित रह सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सनटेनेबल खेती को लेकर आह्वान किया कि थाली भी भरी रहे जेब भी भरी रहे और धरती भी सुरक्षित रहे के नारे को आगे बढ़ाने के लिए वे कार्य करेंगे। भिवानी जिला के इन युवा किसानों के लिए सनटेनेबल खेती के महत्व को समझना भारत के कृषि क्षेत्र में सुरक्षित भविष्य को दर्शाता है।

