Organic Farming in Haryana: पेस्टीसाइड को छोड़ अपनाया देसी तरीका; बराड़ा के किसान ने 16 एकड़ में उगाई आर्गेनिक गेहूं, जानें सफलता का मंत्र

अंबाला के अनिल दत्त रासायनिक खादों को छोड़ आर्गेनिक खेती से मिसाल पेश कर रहे हैं। शेरपुर सुलखनी गांव में 26 एकड़ जमीन पर बिना पेस्टीसाइड गेहूं, गन्ना और सब्जियां उगाकर वे न केवल अच्छी पैदावार ले रहे हैं, बल्कि लोगों को जहरमुक्त अनाज भी दे रहे हैं।

 
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बराड़ा : उपमंडल के एक किसान आर्गेनिक फसल उगाकर लोगों को स्वास्थ्यवर्धक अनाज मुहैया करा रहे हैं। दरअसल  अम्बाला छावनी में रह रहे अनिल दत्त दोसडक़ा-साढौरा रोड स्थित बराड़ा उपमंडल के गांव शेरपुर सुलखनी में कई एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं।

अनिल दत्त ने बताया कि यह उनकी पुस्तैनी जमीन है। आज के युग में जहां धुंआधार पेस्टीसाइड और उरर्वक डालकर खेती जा रही है, ऐसे में उन्होंने आर्गेनिक खेती करने की ठानी और वह कई वर्षों से अपने खेतों में इसी तरह से फसलें उगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह देसी खाद और देसी नुस्खों से उपज ले रहे हैं। अनिल दत्त ने बताया कि वह करीब 20 वर्ष से यहां करीब 26 एकड़ में खेती कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने खेती के बहुत से प्रयोग किए हैं, जिनमें अनाज के अलावा सब्जियां, गन्ना, औषधीय  आदि भी शामिल हैं। इस समय लोग अनाज खाकर लोग बीमार हो रहे हैं, इसलिए उन्होंने आर्गेनिक खेती करने का फैसला लिया। 

इस समय उन्होंने करीब 16 एकड़ में गेहूं की बिजाई की आर्गेनिक पद्वति से की गई है। वह इस फसल में दवाईयां इत्यादि नहीं डालते बल्कि फसल की बुआई के समय का ध्यान रखा जाता है। क्योंकि यदि निर्धारित समय पर फसल की बुआई की जाए तो पैदावार अच्छी होती है। गेहूं की बुआई के लिए अक्टूबर महीने का आखिरी सप्ताह और नवंबर का शुरूआती सप्ताह सही समय है। उर्वरक और पेस्टीसाइड डालने की बजाय देसी नुस्खों का इस्तेमाल करें। जैसे वह फसलों में चूना का छिडक़ाव करते हैं। देशी खाद, गोबर खाद, केंचुआ खाद आदि का इस्तेमाल करते हैं। जिससे वह एक एकड़ में करीब 30 क्विंटल गेहूं की पैदावार हासिल करते हैं।  इसी कारण करनाल के गेहूं बीज इंस्टीटयूट करनाल के डायरेक्टर भी यहां आकर फसल देख चुके हैं और उन्हें सम्मानित भी करके गए। 
 
 
अनिल दत्त ने बताया कि सरकार किसानों को तो बेहतर सुविधाएं दे रही है, लेकिन जो किसान उरर्वक और पेस्टीसाइड का इस्तेमाल करके फसल उगा रहा है और जो किसान बिना इनके फसल उगा रहा है तो दोनों को समान मूल्य दिया जाता हैै। जबकि जो किसान आर्गेनिक खेती कर रहा है, उसे बेहतर मूल्य दिया जाना जरूरी है। ताकि अन्य को इससे प्रेरणा मिलेगी और वह भी आर्गेनिक खेती करेंगे। जितना आप प्रकृति को साफ सुथरा रखेंगे 
 
अनिल दत्त का कहना है कि किसानों को हर बार फसली सीजन में किसी ना किसी चीज की कमी रहती है। इसलिए सरकार किसानों की समस्या को समझे। यानि कभी दवाईयों की कमी, कभी खाद की कमी और कमी।  सरकार नीति बनाए कि प्रत्येक कस्बे में एक एडीओ होना चाहिए जो किसान को उतनी ही दवाई दे, जितनी उसे जरूरत है। जो अच्छा काम कर रहे हैं उन्हें प्रोत्साहित किया जाए, अन्य किसानों को भी उनकी खेती दिखाई जाए। गांव दर गांव जाकर किसानों को जागरूक किया जाए।