Relationship Psychology: डिजिटल दुनिया में रीड रिसीट बनी एंग्जायटी की वजह, जानें क्यों खराब होते हैं रिश्ते

डिजिटल युग में ब्लू टिक और सीन स्टैम्प हमारी बेचैनी क्यों बढ़ा रहे हैं? जानिए इसके मनोवैज्ञानिक कारण और रिश्तों पर पड़ने वाले असर के बारे में।

 
delayed reply relationship issues

मैसेज भेजने के बाद ब्लू टिक आने और उसके बावजूद कोई जवाब न मिलने की स्थिति कई बार मन में तमाम तरह के सवाल खड़े कर देती है। क्या सामने वाला नाराज है? क्या मैंने कुछ गलत कह दिया? इस तरह की छोटी-सी बातें कई बार रिश्तों में गलतफहमी और तनाव की बड़ी वजह बन जाती हैं। आज के इस डिजिटल दौर में जहां एक तरफ कनेक्टिविटी बेहद आसान हो गई है, वहीं दूसरी तरफ यह मानसिक बेचैनी और एंग्जायटी का कारण भी बनती जा रही है।

⏳ चिट्ठी के सब्र से लेकर इंस्टेंट रिप्लाई की चाहत तक का सफर

पहले के समय में किसी के खत का इंतजार करना अपने आप में एक सुकून भरा एहसास होता था। उस दौर में इंतजार के साथ सब्र और एक सकारात्मक उम्मीद जुड़ी होती थी। लेकिन आज स्मार्टफोन की स्क्रीन पर सब कुछ तुरंत दिख जाता है—मैसेज डिलीवर हो गया, पढ़ लिया गया और सामने वाला ऑनलाइन भी है। इसके बावजूद जब जवाब नहीं मिलता, तो यही इंतजार बेचैनी में बदल जाता है। रिसर्च बताती है कि मैसेज का जवाब मिलने में जितनी देरी होती है, नकारात्मक भावनाएं उतनी ही तेजी से उभरती हैं।

🩺 डॉ. समीर मल्होत्रा और एक्सपर्ट्स की सलाह: डिजिटल सर्विलांस से बचें

मैक्स हॉस्पिटल साकेत के मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंसेज डिपार्टमेंट के हेड डॉ. समीर मल्होत्रा का कहना है कि हर लेट रिप्लाई का मतलब इग्नोर करना नहीं होता। सामने वाला किसी जरूरी काम, मीटिंग या मानसिक तनाव में हो सकता है। बार-बार लास्ट सीन देखने या डिजिटल सर्विलांस करने से रिश्ते एक 'डिजिटल कोर्ट रूम' की तरह बन जाते हैं। रिलेशनशिप एक्सपर्ट निशा खन्ना का मानना है कि हमें डिजिटल बाउंड्रीज तय करनी चाहिए और कयास लगाने के बजाय खुलकर आपस में बात करनी चाहिए ताकि रिश्तों में भावनात्मक सुरक्षा बनी रहे।