Smog Impact on Children: दिल्ली के प्रदूषण में सांस लेना हुआ मुश्किल, बच्चों के फेफड़ों पर क्या पड़ता है असर और कैसे करें बचाव?

दिल्ली के स्मॉग और प्रदूषण भरे मौसम में बच्चों को लगातार खांसी और सांस लेने में हो रही परेशानी। जानें क्या कहते हैं डॉक्टर और इससे कैसे बचाएं।

 
Delhi air quality health advisory

राष्ट्रीय राजधानी में स्मॉग के मौसम के दौरान अगर बच्चों को लगातार खांसी की शिकायत हो रही है, तो जरूरी नहीं कि इसकी वजह हर बार केवल वायरल इंफेक्शन ही हो। हवा में मौजूद खतरनाक प्रदूषक तत्व बच्चों की सांस की नलियों में जलन और सूजन पैदा करते हैं, जिससे बलगम बढ़ता है और नलियां अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं। बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं और शरीर के वजन के मुकाबले वे बड़ों की तुलना में ज्यादा हवा अंदर लेते हैं, जिसके कारण उन पर प्रदूषण का दुष्प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ता है। हवा में मौजूद पीएम 2.5 (PM 2.5) जैसे बारीक कण बच्चों में अस्थमा और एलर्जी की समस्या को गंभीर बना सकते हैं।

🩺 एक्सपर्ट्स की सलाह: बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को न दें एंटीबायोटिक, प्रदूषण से ऐसे करें बचाव

रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल के कंसलटेंट पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. निखिल राजवंशी के अनुसार, यदि बच्चे को चार हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी है, रात में नींद टूट रही है या सांस लेने में दिक्कत है, तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। बिना सही जांच के बच्चों को बार-बार एंटीबायोटिक देना नुकसानदायक हो सकता है। वहीं, सी.के. बिरला हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट डायरेक्टर डॉ. विकास मित्तल का कहना है कि प्रदूषण सांस की नलियों की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि घर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) चेक करते रहें, अत्यधिक प्रदूषण होने पर बच्चों को बाहर खेलने से रोकें और घर के अंदर की हवा को साफ रखें।