Difference Between Tanning and Pigmentation: क्या आप भी टैनिंग और पिगमेंटेशन को एक समझते हैं? जानें सही फर्क और बचाव के उपाय

टैनिंग और पिगमेंटेशन दोनों स्किन से जुड़ी समस्याएं हैं, लेकिन दोनों के कारण और असर अलग होते हैं। एक्सपर्ट से जानें इनके बीच का मुख्य अंतर।
 
tanning and pigmentation treatment

पिग्मेंटेशन अगर एक बार हो जाए तो इसे दूर करना आसान नहीं होता. लेकिन टैनिंग हो रही है तो इसे काफी हद तक रिमूव किया जा सकता है. क्या इन दोनों के बीच के असल फर्क को जानते हैं. एक्सपर्ट के जरिए जानें...

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डॉक्टर आरजू पाहवा (कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट, कैलाश दीपक हॉस्पिटल) कहती हैं कि बहुत से लोग टैनिंग और पिगमेंटेशन को एक ही समझते हैं. लेकिन ये दोनों एक जैसी चीजें नहीं हैं. दोनों में मेलानिन का रोल होता है. मेलानिन हमारी स्किन का नेचुरल पिगमेंट है, जो हमारी त्वचा को उसका रंग देता है. हालांकि, दोनों होने का तरीका और ये कितने समय तक रहते हैं, काफी अलग हो सकता है.

डॉक्टर आरजू पाहवा (कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट, कैलाश दीपक हॉस्पिटल) कहती हैं कि बहुत से लोग टैनिंग और पिगमेंटेशन को एक ही समझते हैं. लेकिन ये दोनों एक जैसी चीजें नहीं हैं. दोनों में मेलानिन का रोल होता है. मेलानिन हमारी स्किन का नेचुरल पिगमेंट है, जो हमारी त्वचा को उसका रंग देता है. हालांकि, दोनों होने का तरीका और ये कितने समय तक रहते हैं, काफी अलग हो सकता है.

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डॉक्टर कहती हैं कि टैनिंग असल में धूप के संपर्क में आने पर स्किन का एक नेचुरल रिस्पॉन्स है. जब सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें स्किन तक पहुंचती हैं, तो स्किन खुद को बचाने के लिए ज्यादा मेलानिन बनाने लगती है. इसकी वजह से धूप के संपर्क में आने वाली जगह, जैसे चेहरा, हाथ या बाजू, थोड़ी ज्यादा डार्क या भूरी दिखने लगती है. टैन आमतौर पर कुछ घंटों या दिनों में दिखाई देने लगता है और जब धूप से बचते हैं, तो स्किन के नेचुरल तरीके से रिन्यू होने के साथ धीरे धीरे कम भी हो सकता है.

डॉक्टर कहती हैं कि टैनिंग असल में धूप के संपर्क में आने पर स्किन का एक नेचुरल रिस्पॉन्स है. जब सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें स्किन तक पहुंचती हैं, तो स्किन खुद को बचाने के लिए ज्यादा मेलानिन बनाने लगती है. इसकी वजह से धूप के संपर्क में आने वाली जगह, जैसे चेहरा, हाथ या बाजू, थोड़ी ज्यादा डार्क या भूरी दिखने लगती है. टैन आमतौर पर कुछ घंटों या दिनों में दिखाई देने लगता है और जब धूप से बचते हैं, तो स्किन के नेचुरल तरीके से रिन्यू होने के साथ धीरे धीरे कम भी हो सकता है.

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एक्सपर्ट के मुताबिक पिगमेंटेशन थोड़ा अलग होता है. इसमें स्किन के कुछ हिस्सों में ज्यादा मेलानिन बनता है या जमा हो जाता है. इसलिए पूरी स्किन एक जैसी डार्क होने के बजाय आपको कुछ जगहों पर भूरे या काले दाग और पैच दिखाई दे सकते हैं. और जरूरी नहीं है कि पिगमेंटेशन सिर्फ धूप की वजह से हो. हार्मोनल बदलाव, एक्ने, स्किन में हुई सूजन या चोट और कुछ दवाइयां भी पिगमेंटेशन का कारण बन सकती हैं.

एक्सपर्ट के मुताबिक पिगमेंटेशन थोड़ा अलग होता है. इसमें स्किन के कुछ हिस्सों में ज्यादा मेलानिन बनता है या जमा हो जाता है. इसलिए पूरी स्किन एक जैसी डार्क होने के बजाय आपको कुछ जगहों पर भूरे या काले दाग और पैच दिखाई दे सकते हैं. और जरूरी नहीं है कि पिगमेंटेशन सिर्फ धूप की वजह से हो. हार्मोनल बदलाव, एक्ने, स्किन में हुई सूजन या चोट और कुछ दवाइयां भी पिगमेंटेशन का कारण बन सकती हैं.

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डॉक्टर सलाह देती हैं कि अगर धूप में ज्यादा समय बिताने के बाद पूरा चेहरा या हाथ एक जैसा डार्क हो गया है, तो यह टैनिंग हो सकती है. लेकिन अगर आपको कुछ जगहों पर ऐसे दाग या पैच दिख रहे हैं जो लंबे समय तक बने रहते हैं और धूप से बचने के बाद भी कम नहीं होते, तो यह पिगमेंटेशन हो सकता है.

डॉक्टर सलाह देती हैं कि अगर धूप में ज्यादा समय बिताने के बाद पूरा चेहरा या हाथ एक जैसा डार्क हो गया है, तो यह टैनिंग हो सकती है. लेकिन अगर आपको कुछ जगहों पर ऐसे दाग या पैच दिख रहे हैं जो लंबे समय तक बने रहते हैं और धूप से बचने के बाद भी कम नहीं होते, तो यह पिगमेंटेशन हो सकता है.

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इसलिए दोनों का ट्रीटमेंट भी हमेशा एक जैसा नहीं होता. सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपको टैनिंग है या पिगमेंटेशन. हालांकि, दोनों ही मामलों में आगे की धूप से स्किन को बचाना और सनस्क्रीन लगाना बहुत जरूरी है.

इसलिए दोनों का ट्रीटमेंट भी हमेशा एक जैसा नहीं होता. सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपको टैनिंग है या पिगमेंटेशन. हालांकि, दोनों ही मामलों में आगे की धूप से स्किन को बचाना और सनस्क्रीन लगाना बहुत जरूरी है.

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