Retro Gardening Hacks: बिना पैसे खर्च किए घर की चीजों से गार्डन को रखें हरा-भरा
महंगी खाद और कीटनाशक को कहें अलविदा! अपनाएं ये 5 रेट्रो गार्डनिंग हैक्स। अंडे के छिलके, कॉफी और किचन वेस्ट से अपने पौधों को दें जादुई पोषण और बचाएं पैसे।
गार्डनिंग करने से शरीर के साथ ही मन की एक्सरसाइज भी हो जाती है. दरअसल पेड़-पौधे लगाने से हम बेहतर महसूस करते हैं. इसी के साथ इससे हमें फल-सब्जियां, फूल भी मिल जाते हैं और हवा शुद्ध होती है. इस तरह से बागवानी के फायदे ही फायदे हैं. आज मार्केट में सीड्स ट्रे (बीज बोने वाली ट्रे) से लेकर महंगी खाद और कीटनाशक तक सब उपलब्ध हैं, लेकिन पुराने तरीके आज भी कारगर हैं. पहले के लोग गार्डनिंग में बाजार से खरीदकर खाद, कीटनाशक नहीं लगाते थे, बल्कि वो घर की चीजों का ही यूज करते थे. इससे पौधों को पोषण भी मिल जाता है और एक्स्ट्रा मार्केट जाने का झंझट नहीं होता, साथ ही पैसे की बचत भी होगी.
पौधे या बीज लगाने के बाद इनकी ग्रोथ के लिए जरूरी होता है कि आप सही तरह से सिंचाई (पानी डालना) करें. समय-समय पर मिट्टी को खाद देते रहें ताकि इसमें उर्वरता बनी रहे और कीटनाशक का यूज भी जरूरी होता है ताकि कीटों से बचाव हो. गर्मियों में तेज धूप होती है तो पौधों को हरा रखना टास्क होता है. ऐसे में जान लें वो 5 रेट्रो गार्डनिंग हैक्स जो आपके गार्डन को हरा-भरा बनाए रखेंगे.
ऑर्गेनिक सीड्स ट्रे
बीजों को रोपने के लिए सीड्स ट्रे की जरूरत होती है ताकि ये अच्छे से अंकुरित हो. इसके लिए आप भी कहीं प्लास्टिक की ट्रे का यूज तो नहीं करते हैं और फिर इसमें से पौधे निकालकर गमले में रोपते हो. पुरानी तकनीक इससे कहीं अच्छी है. आपके घर में आने वाली अंडा की ट्रे इसमें आपके काम आ सकती है. इसके अलावा आप एग के शेल भी रख लें. बस ध्यान रखें कि ये पूरी तरह से नहीं टूटे होने चाहिए. इन एग शेल को आप इसकी ट्रे में सेट करें. फिर अंडे के छिलकों में मिट्टी भरें. इसमें बीज रोप दें. जब पौधे निकलने लगें तो सीधे ट्रे को ही आप क्यारियों में रखकर मिट्टी डाल दें. इससे आपके पौधे बहुत अच्छे से ग्रो होंगे, क्योंकि उन्हें पोषण मिलेगा. अंडे के छिलकों को पीसकर आप मिट्टी में लेयर बिछा सकते हैं. इसे कीटों और फंगस से भी बचाव होता है.
गार्डनिंग में कॉफी ग्राउंड
आप गार्डनिंग में कॉफी ग्राउंड (कॉफी बनाने के बाद बचा हुआ पाउडर) का यूज कर सकते हैं. इससे कैल्शियम, फास्फोरस, नाइट्रोजन, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व मिट्टी को मिलते हैं . इससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है. आप बस इसे सीमित मात्रा में ही मिलाएं. ये मिट्टी का बस 20 प्रतिशत ही होनी चाहिए, नहीं तो मिट्टी के पीएच पर असर पड़ सकता है.
नारियल के छिलकों का यूज
अगर आप नारियल के छिलके फेंक देते हैं तो ये गलती न करें. ये मल्चिंग करने में काम आएंगे. गर्मी के दिनों में मिट्टी बहुत जल्दी सूख जाती है. ऐसे में आप नारियल के छिलकों को गद्दे की तरह गमले में बिछा दें. ये नमी को पूरे दिन बनाए रखेंगे. इससे आपके पौधे मुरझाएंगे नहीं. इसके अलावा आप इन नारियल के छिलकों को अच्छी तरह अलग करके छोटे टुकड़ों में कर लें और फिर ग्राइंडर में डालकर पीस लें. आपको कोकोपीट तैयार हो जाएगी. इसे आप मिट्टी में मिला दें. दरअसल कोकोपीट पौधों को पोषण भी देता है और ये मिट्टी में पानी जमा नहीं होने देता है.
किचन वेस्ट कचरा नहीं है
मार्केट से खाद खरीदने से कहीं बेहतर है कि आप घर पर ही इसे तैयार कर लें. इसका पुराना और बेहतरीन तरीका है किचन वेस्ट जो कचरा नहीं है बल्कि पौधों के लिए वरदान माना जाता है. इसके दो तरीके हैं आप कोई जार लें और फलों-सब्जियों के छिलके इसमें डाल दें. इसी के साथ इसमें पानी डालें और फिर इसे बंद करके रख दें. कुछ ही दिनों में लिक्विड फर्टिलाइजर तैयार हो जाएगा. इसे आप पौधों में डाल दें. बचे हुए छिलके फेंक दीजिए. इसके अलावा आप फल-सब्जियों के छिलकों को अपने गार्डन में किसी गड्ढे में दबा दें. कम से कम 1 महीने बाद ये बिल्कुल मिट्टी में मिल जाएंगे. ये आपकी खाद बनकर तैयार हो जाएगी. जगह न हो तो बड़े से गमले में भी आप इस तरह खाद बना सकते हैं. मिट्टी की लेयर, फिर छिलके और फिर मिट्टी की लेयर इसी तरह से इसे तैयार कर लें.
अखबार का करें यूज
आपके घर में पुराने पेपर या अखबार पड़े हो तो रद्दी में फेंकने की बजाय गार्डनिंग में यूज करें. ये एक पुराना हैक है जिससे पौधों के बीच खरपतवार को बढ़ने से रोका जा सकता है और ये मल्चिंग का भी काम करता है. इसके लिए आप क्यारियों या गमलों में अखबार की 4 से 6 परते बिछा दें और ऊपर से थोड़ा सा पानी डालें ताकि ये नम होकर चिपक जाए. इसी के साथ आप कंपोस्ट और सूखी पत्तियां भी बिछा दें.

