Pancreatitis to Cancer Risk: क्या पैंक्रियाज की सूजन बनती है कैंसर? एक्सपर्ट से जानें इसके मुख्य कारण

यूएस एफडीए ने पैंक्रियाटिक कैंसर की नई दवा रासोंक को दी मंजूरी। जानिए पैंक्रियाज के कार्य, पैंक्रियाटाइटिस, कैंसर के शुरुआती लक्षण और डॉक्टर की सलाह।
 
पैंक्रियाज के कार्य और लक्षण

यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में काम आने वाली एक ड्रग रासोंक को मंजूरी दे दी है. इसके जरिए कैंसर से सरवाइवल और थोड़ा बढ़ सकता है. इसे बनाने वाली कंपनी का नाम रिवोल्यूशन मेडिसिन है. इसके ट्रायल में सामने आया कि ये बड़ी हुई स्टेज में पेशेंट के जीवित रहने की दर को करीब-करीब दोगुना करने में सफल रही. एक महीने की दवा की कीमत डॉलर में करीब 39000 है और भारत में ये लगभग 38 लाख रुपये की पड़ेगी.

पर क्या आप जानते हैं कि लिवर और गॉल ब्लैडर के बीच, पेट के पीछे कहीं दुबका हुआ पैनक्रियाज चुपचाप अपना काम करता रहता है. न इसका शोर, न इसकी चर्चा – लेकिन शरीर की सबसे जरूरी दो चीजें, पाचन और ब्लड शुगर, इसी छोटे से अंग के भरोसे टिकी होती हैं. एक्सपर्ट से जानें इससे जुड़ी कई जरूरी बातें…

शरीर के लिए बेहद जरूरी है पैनक्रियाज

डॉक्टर कपिल कुमार कुरसिवाल (सीनियर एडवाइजर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी एवं ऑन्कोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल) का कहना है कि पैनक्रियाज यानी अग्न्याशय, दिखने में भले ही छोटा अंग हो, लेकिन शरीर के लिए इसका काम बहुत बड़ा है. यह पेट के पीछे छिपा बैठा अंग दो अहम मोर्चों पर काम करता है. ये खाना पचाने में मदद करता है और ब्लड शुगर को काबू में रखने में अहम रोल निभाता है. जब इसमें कुछ गड़बड़ होने लगती है, तो असर पाचन से लेकर शुगर लेवल तक, दोनों जगह दिख सकता है.

कैसे अपना वजूद कायम रखता है पैंक्रियाज

पैंक्रियाज अकेले काम नहीं करता. इसका रस लिवर और गाल ब्लैडर से निकलने वाले पित्त (बाइल) के साथ मिलकर एक ही रास्ते से छोटी आंत में पहुंचता है. यानी तीनों अंग एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, फिर भी अपनी-अपनी पहचान अलग रखते हैं. लिवर खून को साफ करने और पित्त बनाने में व्यस्त रहता है, गाल ब्लैडर उस पित्त को जमा करके सही वक्त पर छोड़ने का काम करता है, और पैनक्रियाज बीच में रहकर एंजाइम और हार्मोन का पूरा हिसाब-किताब संभालता है.

यही वजह है कि जब इन तीनों में से किसी एक अंग में गड़बड़ी आती है- चाहे पित्त की पथरी हो या पैंक्रियाज में सूजन- तो असर बाकी अंगों पर भी दिखने लगता है. शरीर के अंदर यह तालमेल इतना बारीक है कि एक अंग की तकलीफ दूसरे की सेहत को हिला सकती है.

कैसे पता चले कि पैंक्रियाज में कुछ गड़बड़ है?

लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि समस्या कितनी गंभीर है. पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द जो कई बार पीठ तक फैल जाए, पाचन बिगड़ना, जी मिचलाना या उल्टी होना, भूख कम लगना और अचानक वजन घटने लगना – इन्हें हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए.

कुछ लोगों में त्वचा या आंखें पीली पड़ने लगती हैं यानी पीलिया हो जाता है, पेशाब का रंग गहरा हो जाता है और मल हल्के रंग का आने लगता है. यहां एक बात साफ समझ लें, ये लक्षण दिखने का मतलब यह नहीं कि तुरंत कैंसर ही है. ये कई और बीमारियों में भी हो सकते हैं.

पैंक्रियाटाइटिस आखिर है क्या?

जब पैंक्रियाज में सूजन आ जाती है, तो उसे पैंक्रियाटाइटिस कहते हैं. यह अचानक भी हो सकता है और लंबे समय तक चलने वाला यानी क्रॉनिक भी. अगर सूजन लंबे समय तक बनी रहे, तो अंग को नुकसान पहुंच सकता है, और कुछ मामलों में यह आगे चलकर कैंसर के खतरे से भी जुड़ जाती है. यही वजह है कि बार-बार पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होना, पाचन की दिक्कत लगातार बने रहना या बेवजह वजन गिरना – इन्हें सिर्फ गैस या अपच समझ कर टाल देना ठीक नहीं.

पैंक्रियाज की समस्या का कैंसर में बदलना

डॉक्टर ने बताया यह जरूरी नहीं कि पैनक्रियाज से जुड़ी हर दिक्कत कैंसर में ही बदले. कैंसर तब शुरू होता है जब पैंक्रियाज की कोशिकाओं में ऐसे बदलाव आने लगते हैं जिससे वे बेकाबू होकर बढ़ने और बंटने लगती हैं. पैंक्रियाज के ज्यादातर कैंसर एक्सोक्राइन कोशिकाओं से शुरू होते हैं, और इनमें सबसे आम है पैंक्रियाटिक एडेनोकार्सिनोमा.

खतरा बढ़ाने वाले कारणों में धूम्रपान, ज्यादा वजन, क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस, डायबिटीज की पुरानी हिस्ट्री और परिवार में किसी को पहले पैंक्रियाज कैंसर होना शामिल है. कुछ जेनेटिक स्थितियां भी खतरा बढ़ा सकती हैं.

पैंक्रियाज कैंसर की सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते. बहुत से लोगों को शुरुआत में कोई खास तकलीफ महसूस ही नहीं होती. जब तक लक्षण दिखने लगते हैं, तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी हो सकती है.

बिना किसी वजह वजन गिरना

भूख लगातार कम होना

पेट या पीठ में दर्द रहना

पीलिया

पेशाब का गहरा रंग

मल का फीका रंग

इन संकेतों को अनदेखा नहीं करना चाहिए. कुछ लोगों में अचानक डायबिटीज शुरू हो जाना या पुरानी डायबिटीज का अचानक बेकाबू हो जाना भी पैंक्रियाज से जुड़ी समस्या का इशारा हो सकता है, हालांकि सिर्फ इस एक लक्षण से कैंसर की पुष्टि नहीं होती.

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

अगर पेट में दर्द बार-बार या लगातार बना रहे, वजन बिना वजह गिर रहा हो, पीलिया दिख रहा हो, पाचन की दिक्कत लंबे समय से चल रही हो, या ब्लड शुगर में अचानक उतार-चढ़ाव आ रहा हो, तो देर न करें और डॉक्टर को दिखाएं. जरूरत के हिसाब से डॉक्टर ब्लड टेस्ट, सीटी या एमआरआई जैसी इमेजिंग जांच करवा सकते हैं. अगर कैंसर की आशंका पक्की करनी हो, तो कुछ मामलों में बायोप्सी भी करानी पड़ सकती है.